महामारी की स्थिति पता करने के लिए सीरो सर्वे एक अहम भूमिका निभाता है लेकिन संक्रमण की दूसरी लहर में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर ) इस पर चर्चा तक नहीं कर रहा है। यह स्थिति तब है जब हाल ही में दिल्ली एम्स के निदेशक कह चुके हैं कि देश में एक बड़ी आबादी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुकी है।
एक तरह से देश हर्ड इम्युनिटी की ओर बढ़ रहा है लेकिन वर्तमान स्थिति देखकर हर्ड इम्युनिटी भी बेअसर दिखाई दे रही है। ऐसे में तत्काल बड़े स्तर पर सीरो सर्वे की आवश्यकता है।
इसे लेकर आईसीएमआर की ओर से भी कोई जानकारी नहीं दी गई लेकिन आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ . बलराम भार्गव दूसरी लहर आने से पहले ही संकेत दे चुके थे कि एक बड़ी आबादी को कोरोना संक्रमण का खतरा है।
सीरो सर्वे के जरिए ही उन्हें यह संकेत प्राप्त हुए थे। जानकारी के अनुसार आईसीएमआर ने अब तक देश में तीन बार सीरो सर्वे किया है। तीसरा सर्वे पिछले वर्ष दिसंबर और इस साल की आठ जनवरी तक किया था।
इसके जरिए सरकार को साक्ष्य मिले थे कि 10 वर्ष या उससे अधिक आयु को 21 फीसदी से ज्यादा आबादी संक्रमण के दायरे में आ चुकी है । 700 जगहों पर किए इस सर्वे में 28589 लोगों के सैंपल लेकर जांच की गई थी।
इस दौरान 21.4 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी पाए गए थे। नई दिल्ली स्थित महामारी विशेषज्ञ डॉ . दिव्येंदु मिश्रा का कहना है कि देश को तत्काल चौथे सीरो सर्वे की आवश्यकता है क्योंकि इस बार देश के ग्रामीण क्षेत्रों में भी महामारी पहुंच चुकी है।