दिल्ली स्थित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में तिरंगा कार्यक्रम आयोजित करने पर विवाद हो गया है। आरोप है कि एनएसडी के कुछ छात्रों ने रविवार को संस्थान के एक थियेटर में ‘हर घर तिरंगा कार्यक्रम’ कराने का कड़ा विरोध किया और कार्यक्रम स्थल से भारत माता की तस्वीर और राष्ट्रध्वज जबरन हटा दिया। छात्रों को एनएसडी परिसर में आरएसएस से जुड़े संगठन के द्वारा तिरंगा कार्यक्रम आयोजित करने को लेकर गहरी नाराजगी थी। इस पर बवाल बढ़ गया और कथित तौर पर कार्यक्रम की अनुमति देने के आरोप में एनएसडी के रजिस्ट्रार ज्वाला प्रसाद को उसी दिन उनकी सेवा से मुक्त कर दिया गया। हालांकि, एनएसडी के छात्रों ने कार्यक्रम की बजाय केवल थियेटर के इस्तेमाल को लेकर अपना विरोध होने की बात कही है।
हालांकि, छात्रों और कार्यक्रम आयोजकों के बीच विवाद बढ़ने के बीच एनएसडी डायरेक्टर रमेश गौड़ की अनुमति के बाद कार्यक्रम को संस्थान के ही दूसरे थियेटर में संपन्न कराया गया। लेकिन एनएसडी रजिस्ट्रार को जिस तरह रविवार के दिन आनन-फानन में पदमुक्त किया गया, उसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हटाए गए रजिस्ट्रार ज्वाला प्रसाद ने संस्कृति मंत्रालय के सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि उन्हें बेहद गलत तरीके से पदमुक्त किया गया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें रविवार के दिन पद मुक्त कर दिया गया, जबकि नियमों के अनुसार रविवार के दिन उन्हें इस तरह नहीं हटाया जा सकता। अहम बात यह है कि उन्होंने छह अगस्त से 16 अगस्त तक के लिए नियमों के आधार पर छुट्टी ले रखी थी। लेकिन इसी बीच उन्हें आठ अगस्त से सेवा से मुक्त कर दिया गया।
एनएसडी में आयोजित कार्यक्रम के आयोजक सेवा भारती के प्रमुख अधिकारी भूपेंद्र कुमार ने अमर उजाला से इस मुद्दे पर बातचीत की। उन्होंने आरोप लगाया कि एनएसडी के कुछ छात्रों को उनके तिरंगा कार्यक्रम को लेकर विरोध था और इसी कारण उन्होंने कार्यक्रम स्थल से भारत माता की तस्वीर और राष्ट्रध्वज को गलत तरीके से हटाया। उन्होंने दावा किया कि संस्थान के रजिस्ट्रार से कार्यक्रम के आयोजन को लेकर मौखिक अनुमति ली गई थी। जब छात्रों ने कार्यक्रम को लेकर विरोध किया तब डायरेक्टर की अनुमति से इसे दूसरे थियेटर (सम्मुख) में आयोजित किया गया।