नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एनआरएफ) के गठन की प्रक्रिया सरकार ने तेज कर दी है। इसके जरिए विज्ञान, तकनीक और इनोवेशन में शोध को तेजी दी जाएगी। यहां मौजूदा फंडिंग को जारी रखते हुए एनआरएफ सहयोग उपलब्ध करवाएगा।
पीएम नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2019 में इंडियन साइंस कांग्रेस में एनआरएफ की योजना रखी और उसी वर्ष जून में संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने एनआरएफ की घोषणा कर बताया था कि यह विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों में शोध को बढ़ावा देगा।
सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) अजय कुमार सूद ने बताया कि एनआरएफ के जरिए बड़े स्तर की फंडिंग जुटाने में भी मदद मिलेगी। वित्त मंत्री ने पिछले वर्ष बजट में एनआरएफ के लिए पांच साल में 50 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था करने की घोषणा की थी।
अभी यहां से आती है फंडिंग
शोध व अनुसंधान में फंडिंग के लिए देश में इस समय विज्ञान एवं तकनीकी विभाग (डीएसटी), विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी), वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और बायोटेक्नोलॉजी विभाग प्रमुख एजेंसियां हैं। सूद ने साफ किया कि एनआरएफ के बावजूद इन एजेंसियों की फंडिंग जारी रहेगी।
समन्वय की जरूरत
प्रधानमंत्री की विज्ञान, तकनीक व इनोवेशन सलाहकार परिषद ने दिसंबर 2019 में एनआरएफ पर अपनी रिपोर्ट में कहा था कि देश में शोध को लेकर समन्वय कम है। हमें योजनाबद्ध ढंग से समन्वय बढ़ाना होगा। कई एजेंसियां फंडिंग के लिए बनी तो हैं, लेकिन समन्वय न होने से प्रभावी परिणाम नहीं मिल रहे हैं।