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Good News: अब मरीज या तीमारदार नहीं कर पाएंगे डाक्टरों के साथ दुर्व्यवहार, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने पेश किया मसौदा

Wed, 08 Jun 2022 11:11 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रस्तावित मसौदे के मुताबिक, जो डॉक्टर मरीज का इलाज करेगा वह अपने कामों के लिए पूरी तरह से जवाबदेह होगा। इलाज के दौरान मरीज या उसके रिश्तेदार अगर डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं तो डॉक्टर उस मरीज का इलाज करने से मना कर सकते हैं।
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राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने पेश किया मसौदा - फोटो : iStock
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विस्तार
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कई बार इलाज के दौरान मरीज या मरीजों के परिजन डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार या हिंसा करते हैं, लेकिन अब मरीज या उनके परिजन चिकित्सा कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार या हिंसा नहीं कर सकेंगे। दरअसल, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने एक मसौदा पेशेवर आचरण नियमन पेश किया है। मसौदा के मुताबिक, दुर्व्यवहार या हिंसक व्यवहार करने पर डाक्टर इलाज करने से भी मना कर सकेंगे। 

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राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने पेश किया है मसौदा
 राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा पेश किए गए मसौदा पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर नियमन 2022 के अनुसार, अब अस्पताल में मरीज का इलाज कर रहे जिम्मेदार डाक्टर से मरीज या उसके परिजन द्वारा मांगे जाने पर मेडिकल रिकार्ड पांच कार्य दिवस में उपलब्ध करा सकेंगे। हालांकि, अगर आपातकालीन स्थिति होने पर डॉक्टर को मेडिकल रिकार्ड उसी दिन उपलब्ध कराना होगा। वर्तमान में मरीज या उसके तीमारदारों द्वारा मेडिकल रिकार्ड मांगे जाने पर इलाज के लिए जिम्मेदार डॉक्टर को 72 घंटे में देना होता है।

इलाज करने वाला डॉक्टर होगा पूरी तरह से जिम्मेदार
प्रस्तावित मसौदे के मुताबिक, जो डॉक्टर मरीज का इलाज करेगा वह अपने कामों के लिए पूरी तरह से जवाबदेह होगा। इलाज के दौरान मरीज या उसके रिश्तेदार अगर डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं तो डॉक्टर उस मरीज का इलाज करने से मना कर सकते हैं। उसके अलावा ऐसे मरीजों को इलाज के लिए कही और भी भेजा जा सकता है। इसमें यह भी कहा गया है कि कोई भी डॉक्टर ड्यूटी पर या ड्यूटी के बाद अपने काम को प्रभावित करने वाले नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करेगा। अगर कोई ऐसा करेगा उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। 
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नाम के आगे मेडिकल डॉक्टर लिख सकेंगे
एनएमसी के आचार एवं मेडिकल पंजीकरण बोर्ड के सदस्य डा. योगेंदर मलिक ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि अगर मरीज या उसके परिजनों द्वारा इलाज के लिए शुल्क नहीं देगा तो उसका इलाज करने से डाक्टर मना भी कर सकेगा। ये नया प्रावधान जोड़ा गया है। हालांकि, सरकारी डॉक्टर या आपात सेवा में शामिल डाक्टरों पर यह प्रावधान नहीं लागू होगा। इसके अलावा इसमें यह भी कहा गया है कि पंजीकृत चिकित्सक अपने नाम के पहले सिर्फ डा. यानी डाक्टर लिखने के बजाय मेडिकल डाक्टर भी लिख सकेंगे। 

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