एनआईए ने पीएफआई के खिलाफ इस महीने अपना पांचवां आरोप पत्र दायर किया है। एजेंसी ने प्रतिबंधित संगठन की एनईसी के 12 सदस्यों, संस्थापक सदस्यों और वरिष्ठ नेताओं समेत 19 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के खिलाफ इस महीने अपना पांचवां आरोप पत्र दायर किया है। एजेंसी ने प्रतिबंधित संगठन की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (एनईसी) के 12 सदस्यों, संस्थापक सदस्यों और वरिष्ठ नेताओं समेत 19 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। एनआईए ने यह आरोप पत्र एक संगठन के रूप में कथित रूप से 'देश को अस्थिर करने के उद्देश्य से आपराधिक साजिश' से जुड़े मामले में दायर किया है।
एनआईए ने कहा कि उसने पीएफआई के 37 बैंक खातों को जब्त किया है। इसके अलावा पीएफआई से जुड़े 19 लोगों के 40 बैंक खातों को भी जब्त किया है। इससे संगठन की फंडिंग की गतिविधियों पर रोक लग गई है। गुवाहाटी (असम), सुंदीपुर (पश्चिम बंगाल), इंफाल (मणिपुर), कोझीकोड (केरल), चेन्नई (तमिलनाडु), नई दिल्ली, जयपुर (राजस्थान), बेंगलुरु (कर्नाटक), हैदराबाद (तेलंगाना) और कुरनूल (आंध्र प्रदेश) सहित देश भर में इन बैंक खातों पर कार्रवाई की गई।
विज्ञापन
एनआईए ने 105 आरोपियों के खिलाफ दायर किया आरोप पत्र
एनआईए ने पीएफआई के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में दर्ज मामलों में 105 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया है। इसमें उन पर देश को अस्थिर करने के उद्देश्य से आपराधिक साजिश रचने और 2047 तक इस्लामी खिलाफत स्थापित करने के लिए युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया गया है।
इस महीने में ही एजेंसी ने पांच आरोपपत्र (13 मार्च से) दायर किए हैं, जिनमें से पहले में राजस्थान के दो आरोपियों के नाम है, जिन्होंने भोले-भाले मुस्लिम युवाओं को कट्टर बनाने और हथियारों के प्रशिक्षण के जरिए भारत में विभिन्न समुदायों के बीच दरार पैदा की, उन्हें हथियारों और विस्फोटकों को चलाने का प्रशिक्षण दिया और आतंकी कृत्यों को अंजाम देने के लिए धन जुटाया। कोटा के मोहम्मद आसिफ उर्फ आसिफ और राजस्थान के बारां के सादिक सर्राफ का नाम पहली चार्जशीट में है।
पीएफआई की हिंसक चरमपंथ की गतिविधियों और एजेंडे से संबंधित मामले की जांच का एक बड़ा हिस्सा पूरा होने पर एनआईए ने ये आरोप पत्र दायर करना शुरू कर दिया । पीएफआई के सभी 105 सदस्यों और प्रतिबंधित संगठन के समर्थकों पर भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम 1967 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।