एनजीटी ने कहा, आठ अगस्त के आदेश के बावजूद गंगा में सीधे क्रोमियम युक्त अनट्रीटेड सीवेज डालने की अनुमति देने से पर्यावरण को हुए नुकसान के लिए राज्य सरकार को 10 करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति देनी होगी। सरकार यह रकम दोषी अधिकारियों से वसूले और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई भी करे।
यूपीपीसीबी-जल निगम पर एक-एक करोड़ जुर्माना
एनजीटी ने यूपीपीसीबी को पहले के आदेश का पालन न करने और अनट्रीटेड सीवेज की अनदेखी का दोषी ठहराते हुए एक करोड़ रुपये जुर्माना लगाया है। यूपी जल निगम भी एक करोड़ जुर्माना देगा। यह रकम एक महीने में सीपीसीबी में जमा करानी होगी। टेनरियों से वसूली यूपीपीसीबी को करनी होगी।
पीठ ने कहा कि क्षतिपूर्ति का आकलन 2019 में ही किया गया लेकिन यह साफ नहीं है कि क्या हकीकत में वसूली की उम्मीद है? यूपीपीसीबी की पहले की उदासीनता के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं हो सकता है। पीठ ने कहा, राज्य सरकार क्रोमियम के निष्पादन के लिए इसी साल 22 अगस्त को सुझाए निर्देशों के मुताबिक कदम उठाए। अगर इसमें नाकाम रहे तो उसे फिर जुर्माना चुकाना होगा।
प्रभावित इलाकों का अध्ययन कराएं
पीठ ने कहा कि सरकार प्रभावित इलाके में पीने योग्य पानी की आपूर्ति के साथ अन्य दिशानिर्देशों पर कदम उठाए। साथ ही विशेषज्ञ समिति तीन महीने के अंदर इलाके में स्वास्थ्य अध्ययन करे। सीपीसीबी उचित दिशानिर्देश जारी कर सकती है ताकि यह सुनिश्चित कराया जा सके कि कोई भी प्राधिकरण जल प्रवाह में प्रदूषित सीवेज या प्रदूषित पदार्थों को डालने की अनुमति न दे सकें।