राज्यसभा चुनाव में उम्मीद से ज्यादा सीट जीतने के बाद भाजपा अब कांग्रेस के खिलाफ और आक्रामक रुख अपनाएगी। संसद के मानसून सत्र में जीएसटी को ढाल बनाकर पार्टी कांग्रेस पर और हमले करेगी। वह राज्यसभा में रुकावटों की परवाह किए बिना अपने एजेंडे को बढ़ाएगी।
राष्ट्रीय कार्यसमिति की चल रही बैठक के बीच एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पीएम मोदी ने अब तक कांग्रेस पर नरमी दिखाई है, लेकिन अब मोदी-शाह की जोड़ी ने भिड़ जाने की रणनीति अपनाई है। इसका ट्रेलर राज्यसभा के चुनाव में स्पष्ट देखने को मिला। विधानसभाओं में पार्टी की ताकत से ज्यादा उम्मीदवार राज्यसभा के लिए जीतकर आए हैं। एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी विपक्ष के साथ सहयोग के मामले में बहुत ही स्पष्ट हैं।
यूपीए शासन के दौरान उनके खिलाफ तरह-तरह के षड्यंत्र हुए। मोदी की तुलना रोम के नीरो से करने के साथ सर्वोच्च न्यायालय के जरिए विशेष जांच दल का गठन, इशरत जहां का मामला और अंत में स्नूपगेट को उनके खिलाफ हथियार बनाया गया। इसके बावजूद मोदी ने मंत्रियों को निर्देश दिया कि वे विपक्ष को साधकर चलें। खुद पीएम ने अपनी ओर से जीएसटी पर सोनिया और मनमोहन सिंह को चाय पर बुलाया। इसके बावजूद कांग्रेस का दिल पिघला नहीं। अब भाजपा उसके रवैये को पूरी तरह जनता के सामने उजागर करेगी। उन्होंने ने कहा कि भाजपा संसद में कांग्रेस को मजबूर करेगी कि वह या तो अपने सांसदों को व्हिप जारी करे या हंगामा करें।
जीएसटी पर पार्टी ने सभी संसदीय परंपरा का निर्वहन कर लिया है। सेलेक्ट कमेटी, स्टैंडिंग कमेटी और सर्वदलीय बैठक सरीखी सारी कवायदें पहले ही की जा चुकी हैं। कांग्रेस के पास अब सिर्फ विधेयक के समर्थन का या फिर खुलकर विरोध करने का रास्ता है। भाजपा नेता के अनुसार ममता बनर्जी, लालू यादव, नीतीश कुमार, शरद पवार, मुलायम सिंह यादव, नवीन पटनायक और सीताराम येचूरी पहले से ही जीएसटी के समर्थन में हैं। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता भी 14 जून को पीएम मोदी से मुलाकात करने वाली हैं। मुलाकात में मोदी उनसे जीएसटी का समर्थन करने को कह सकते हैं।