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राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग की देशभर के सफाई कर्मियों को रेगुलर करने की मांग

Fri, 23 Nov 2018 06:02 PM IST
हरेन्द्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने केंद्र और राज्य सरकारों में तैनात ग्रुप ‘डी’ में आने वाले सफाई कर्मचारियों को नियमित करने और न्यूनतम वेतन तय करने की मांग की है। आयोग ने सरकार को पत्र लिखकर 1970 में बने एक कानून का हवाला भी दिया है। साथ ही आयोग ने मैनुअल स्कैवेंजिंग के चलते लगातार हो रही मौतों के आंकड़े को कम करने के लिए सभी जगह अंडरग्राउंड ड्रैनेज सिस्टम बनाने की सिफारिश की है।

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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तहत आने वाले राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के सदस्य जगदीश हिरेमनी ने अमर उजाला को बताया कि देश के केंद्रीय और राज्य सरकारों में पिछले 15 सालों से कार्यरत ग्रुप ‘डी’ में आने वाले सफाई कर्मियों को स्थाई नौकरी देने की बजाय ठेकेदारों के जरिए काम कराया जाता है। हिरेमनी के मुताबिक 1970 के संविदा श्रम (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम में स्पष्ट है कि ग्रुप ‘डी’ के तहत आने वाले कार्यों को ठेकेदारी प्रथा के जरिए नहीं कराया जा सकता है।

आयोग का कहना है कि केंद्र, राज्य सरकारों एवं सरकारी संस्थानों को सफाई कर्मियों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान को देखते हुए उन्हें संविदा पर रखने की बजाए रेगुलर बेसिस पर रखा जाए। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक पायलेट प्रोजेक्ट के तहत 44 जिलों में मैला ढोने वालों की संख्या तकरबीन 21 हजार और सफाई कर्मियों की संख्या तकरीबन 32 लाख है।   
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आयोग का कहना है कि कर्नाटक देश का पहला ऐसा राज्य है, जहां राज्य सरकारों के विभागों में ठेकेदारी प्रथा में काम कर रहे सफाई कर्मियों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। हिरेमनी ने बताया कि कर्नाटक में 32 हजार सफाई कर्मचारी हैं, जिनमें से 13 हजार कर्मी स्थाई किए जा चुके हैं और बाकी कर्मियों को चरण-दर-चरण प्रक्रिया के तहत नियमित किए जाने का प्रस्ताव है।

इसके अलावा आयोग ने इन सफाई कर्मियों के लिए न्यूनतम वेतनमान निर्धारित निर्धारित करने की भी मांग की है। आयोग का कहना है कि कई राज्यों में सफाई कर्मियों को न्यूनतम वेतनमान से भी कम सैलरी मिल रही है, जिसे पूरे देश में एक समान करने की आवश्यकता है। आयोग ने सिफारिश की है कि सफाई कर्मियों की न्यूनतम सेलरी 20 हजार रुपये महीना होनी चाहिए। हिरेमनी के मुताबिक कर्नाटक के सरकारी अस्पतालों में सफाई कर्मियों को पहले 3 से 6 हजार रुपये सैलरी मिलती थी, लेकिन अब उन्हें 18 हजार रुपये मिल रहा है।

आयोग ने सरकार से सिफारिश की है कि कानून ला कर मैनुअल स्कैवेंजिंग यानी हाथ से मैला ढोने की प्रथा को खत्म किया जाए। साथ ही सभी स्थानीय निकायों को सीवर सफाई के लिए मशीनों का उपयोग करने के साथ भूमिगत नाली व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए जाएं। आयोग का कहना है कि सीवर सफाई रोबो मशीनों से हो ताकि सीववर सफाई के कार्यों के दौरान होने वाले हादसों पर रोक लगाई सके।

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