कोरोना की शुरुआत में पहला नोडल सेंटर देश में आरएमएल को बनाया गया था। हमारे लिए सब कुछ नया था। न जांच, न इलाज। फिर भी मरीज को बचाना आसान नहीं था। हालांकि इन्फ्लूएंजा को लेकर हमारे अनुभव यहां काम आए। हर दिन एक नया मंत्र, नई शुरुआत और दुर्गम चुनौती के साथ हमारी टीम ने मरीजों को संभाला है।
हालांकि लॉकडाउन के दौरान मरीजों की वह हालत सोचकर भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उस वक्त मरीज बहुत खराब हालत में अस्पताल आ रहे थे। कई मरीज ऐसे भी हैं, जो अस्पताल आते-आते ही दम तोड़ गए। अन्य अस्पतालों से मरीजों को गंभीर स्थितियों में रेफर किया जा रहा था।
एक तरह की हाय-तौबा सी मची थी। घर, परिवार, बच्चे सबको पीछे रखते हुए एक-एक कोरोना योद्घा हर मरीज की जान बचाने में जुटा था। इन पलाें को कभी नहीं भूल सकती। अब स्थिति बेहतर है, लेकिन यह सफर बहुत कुछ सिखाकर चला गया-डॉ. मीनाक्षी भारद्वाज चिकित्सा निदेशक आरएमएल अस्पताल
(मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर की निवासी। दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज से चिकित्सकीय पढ़ाई। इसी महीने जुलाई में रिटायरमेंट।)
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