भारत में अब बच्चों की देखभाल के लिए पितृत्व अवकाश को बढ़ाने की सिफारिश की गई है। दरअसल, इसके पीछे विशेषज्ञों की मंशा माताओं पर से बच्चों की परवरिश का बोझ कम करना है। एक्सपर्ट्स ने ये राय मातृत्व लाभ अधिनियम पर आयोजित कानून समीक्षा परामर्श में रखी है।
अभी कितना मिलता है पितृत्व अवकाश
राष्ट्रीय महिला आयोग ने इसके बारे में बताते हुए कहा कि सिफारिश का उद्देश्य पितृत्व अवकाश को बढ़ाने के अलावा नियोक्ताओं को महिला श्रमिकों को रोजगार देने के लिए प्रोत्साहित करना भी है। गौरतलब है कि वर्तमान में केंद्र सरकार के तहत काम करने वाले कर्मचारियों को 15 दिनों का पितृत्व अवकाश दिया जाता है। हालांकि निजी क्षेत्र में पितृत्व अवकाश के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं है। वहीं, महिलाओं को 26 सप्ताह (छह महीने) के मातृत्व अवकाश का प्रावधान है।
पितृत्व अवकाश की अवधि को बढ़ाने की सिफारिश
गौरतलब है कि राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 और 2017 के संशोधन पर अंतिम कानून समीक्षा परामर्श का आयोजन किया था। इसका उद्देश्य महिलाओं से जुड़े कानूनों की समीक्षा और उनका विश्लेषण करना और त्रुटियों में सुधार करने के लिए संशोधन की सिफारिश करना था। इस बैठक में विशेषज्ञों द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण सुझावों में पितृत्व अवकाश की अवधि को बढ़ाने की सिफारिश शामिल है। इसके पीछे विशेषज्ञों का तर्क है कि इससे बच्चों की परवरिश का बोझ दोनों के बीच समान रूप से साझा किया जा सकेगा।
गौरतलब है कि ने मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 और 2017 के संशोधन को लेकर एनसीडब्ल्यू ने पूरे देश से विशेषज्ञों के विचार, सुझाव मांगे थे। एनसीडब्ल्यू ने इसके लिए एक प्रारंभिक परामर्श और पांच क्षेत्रीय स्तर के परामर्श आयोजित किए हैं। महिला आयोग द्वारा जारी बयान में बताया गया है कि इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों के कानूनी विशेषज्ञों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों को आमंत्रित किया था।