यूपी विधानसभा चुनाव में पिछड़ा वर्ग आरक्षण का मुद्दा दोबारा से गर्म हो सकता है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने केंद्र सरकार से ओबीसी आरक्षण को श्रेणीगत करने के साथ जाति आधारित जनगणना के आंकडे सार्वजनिक करने की मांग की है। माना जा रहा है कि आयोग के इस कदम से केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। शायद यही वजह है कि केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने पिछड़ा वर्ग आयोग के कार्यक्रम से दूरी बरती।
आयोग के जरिए आयोजित ओबीसी आरक्षण नीति लागू करने विषय के परिचर्चा में गहलोत को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रण था। लेकिन ऐन मौके पर गहलोत ने कार्यक्रम से दूरी बनाई। मंत्री महोदय की अनुपस्थिति में ही राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने ओबीसी आरक्षण नीति लागू करने के मामले पर दिनभर मंथन किया।
मंथन के बाद सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर आयोग ने सरकार से ओबीसी को सरकारी नौकरी के साथ शिक्षण संस्थानों की नौकरियों में भी हर स्तर पर 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग की है। इसके अलावा जातिगत जनगणना के आंकड़ो की मांग करते हुए ओबीसी आरक्षण को जल्द से जल्द श्रेणीगत करने की मांग की है। यही नहीं आयोग ने ओबीसी वर्ग के लिए सरकारी नौकरीयों की तरह प्राईवेट कंपनियों में भी आरक्षण देने की मांग की है। हालांकि प्राईवेट कंपनियों में ओबीसी के लिए आरक्षण की मांग का भाजपा शासित हरियाणा सरकार ने विरोध किया है।
आयोग ने भारतीय प्रशासनीक सेवा 2015 की टॉपर रहीं हरियाणा की टीना डाबी को हेम कैडर न दिए जाने पर भी सवाल उठाया है। आयोग का कहना है कि हरियाणा की रहने वाली डाबी को होम कैडर के रूप में हरियाणा मिलना चाहिए था। आयोग के अध्यक्ष वी इश्वरैया ने कहा है कि सिविल सेवा परिक्षा में सामान्य श्रेणी के तहत टॉप पर रहने वाली डाबी को मनपसंद कैडर मिलना चाहिए था। मगर उन्हें आरक्षित श्रेणी में शामिल कर उनसे मनपसंद कैडर पाने के अधिकार से वंचित रखा गया है।