तस्वीरें देखने में शायद आपको कुछ अजीब न लगे लेकिन इनके पीछे बेबसी और मजबूरी की वो दास्तां है जो आपको झकझोर देगी। जिस बेटी के हाथों में आज चाय के बर्तन हैं कभी उनमें ढेरों पदक और नेशनल चैंपियन का तमगा हुआ करता था। आगे तस्वीरों में देखिए पूरी कहानी।
National champion powerlifter
- फोटो : ani
चोटिल हो जाने की वजह से राष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग चैंपियन संतोष को अपने पिता की चाय की दुकान में काम करना पड़ रहा है। पिता की कुछ और मदद करने के लिए वह हरियाणा के सोनीपत में बाउंसर के रूप में भी काम करती है।
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राष्ट्रीय चैंपियन पॉवरलिफ्टिंग प्रशिक्षण के दौरान वह घायल हो गयी थी, जिसके बाद उसे अपना सपना छोड़ना पड़ा। आपको बता दें कि संतोष ने कई चैम्पियनशिप जीते हैं।
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राष्ट्रीय चैंपियन संतोष ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान वह घायल हो गयी थी जिससे उसे पावरलिफ्टिंग को छोड़ना पड़ा।
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अब मजबूरी ऐसी है कि उसे अपने पिता की दुकान में चाय बेचनी पड़ती है। उसने सरकार से एक सरकारी नौकरी की मांग की है क्योंकि वह चोट के बाद पॉवरलिफ्टिंग में आगे अपना करियर नहीं बना सकती है।