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Delhi Ordinance: संसद में आसानी से पास हो सकता है दिल्ली अध्यादेश, जगन की पार्टी देगी एनडीए को समर्थन

Thu, 27 Jul 2023 03:39 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राज्यसभा में वाईएसआर का समर्थन सरकार के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है और लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी दिल्ली अध्यादेश आसानी से पास हो सकता है।
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वाईएसआर रेड्डी - फोटो : Social Media
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विस्तार
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दिल्ली में प्रशासनिक सेवाओं पर नियंत्रण के लिए लाया जा रहा 'नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली (संशोधन) बिल, 2023' संसद के दोनों सदनों से आसानी से पास हो सकता है। लोकसभा में एनडीए का बहुमत है लेकिन राज्यसभा में एनडीए को परेशानी हो सकती थी लेकिन अब एक पार्टी ने एनडीए की उस परेशानी को भी दूर कर दिया है। बता दें कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी केंद्र सरकार के बिल को अपना समर्थन दे सकती है। पार्टी के वरिष्ठ नेता ने इसकी जानकारी दी है।
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अविश्वास प्रस्ताव पर भी सरकार का समर्थन कर रही वाईएसआरसीपी
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी बुधवार को मणिपुर मुद्दे पर संसद में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर भी सरकार का समर्थन कर रही है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को राज्यसभा में नौ और लोकसभा में 22 सांसद हैं। राज्यसभा में वाईएसआर का समर्थन सरकार के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है और लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी दिल्ली अध्यादेश आसानी से पास हो सकता है। 

वाईएसआरसीपी के नेता वी विजयसाई रेड्डी ने बताया कि उनकी पार्टी अविश्वास प्रस्ताव और दिल्ली अध्यादेश के मुद्दे पर सरकार का समर्थन करेगी। पार्टी के सांसदों को भी इस बारे में जानकारी दे दी गई है। नौ सांसदों वाली बीजू जनता दल भी एनडीए सरकार का समर्थन कर सकती है। हालांकि अभी तक नवीन पटनायक ने अपना रुख साफ नहीं किया है। 
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मतदान से दूरी
बीजद, बसपा और जदएस का भी साथ संभव  दिल्ली अध्यादेश पर सरकार को बसपा, बीजद व जदएस का भी परोक्ष साथ मिल सकता है। इन तीनों दल ने इस विधेयक पर होने वाले मतदान से दूरी बरतने का संदेश दिया है। ऐसे में विधेयक पारित कराने के लिए सरकार को 115 सदस्यों के ही समर्थन की जरूरत पड़ेगी।

विपक्ष का समर्थन जुटा रही आप सरकार
बता दें कि केंद्र सरकार नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली (संशोधन) बिल, 2023 जल्द ही संसद में पेश कर सकती है। इस बिल की मदद से दिल्ली में प्रशासनिक सेवाओं पर केंद्र सरकार का नियंत्रण हो जाएगा। दिल्ली की आप सरकार इस बिल का विरोध कर रही है। दिल्ली सरकार केंद्र पर चुनी हुई सरकार को कमजोर करने और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए लाया गया बिल बता रही है और विपक्षी पार्टियों से बिल का विरोध करने की अपील कर रही है।  
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