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National Science Day: क्यों होता है सागर का पानी नीला बताया था C V Raman

Wed, 28 Feb 2018 04:36 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Sir C.V. Raman
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आज देश  National Science Day मना रहा है। हर साल 28 फरवरी को देश रमन इफेक्ट की याद में  National Science Day मनाया जाता है। रमन इफेक्ट देश के महान वैज्ञानिक सर सी.वी. रमन की एक खोज को बयां करता है। रमन ने इसी दिन अपनी खोज की घोषणा की थी, जिसे उन्हीं के नाम पर 'रमन इफेक्ट' कहा गया। प्रकाश के प्रकीर्णन पर किए गए कार्य के लिए उन्हें 1930 में भौतिकी का प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार भी दिया गया था। वह विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले एशियाई थे।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बुधवार को देशवासियों को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर शुभकामनाएं दी और वैज्ञानिकों की उपलब्धियों पर गर्व जताया। उन्होंने बधाई देते  हुए ट्वीट भी किया।  'मैं सभी साइंस प्रेमियों को सलाम करता हूं और उनमें वैज्ञानिक उत्साह की बढ़ोतरी की कामना करता हूं। देश को अपने वैज्ञानिकों पर गर्व है।'

 प्रधानमंत्री ने इससे पहले रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम में भी सी.वी. रमन सहित वैज्ञानिकों और विज्ञान के क्षेत्र में किए जा रहे योगदान को याद किया। 
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सी वी का रमन इफेक्ट
'रमन इफेक्ट' देश के महान वैज्ञानिक सीवी रमण की खोज की एक रोचक कहानी है। बताते हैं कि 1920 के दशक में जब सी. वी रमन समुद्री मार्ग से स्वदेश लौट रहे थे तो उन्होंने भूमध्यसागर के पानी में अनोखा नीला और दूधियापन देखा। 

 वह जब कलकत्ता विश्वविद्यालय पहुंचे तो उन्होंने निर्जीव वस्तुओं पर प्रकाश के बिखरने का अध्ययन शुरू किया। उनकी इस शोध से इस बात का पता चलता है कि समुद्र के जल का रंग नीला क्यों दिखता है।

रमन प्रभाव ये भी कहता है कि जब प्रकाश की एक तरंग एक द्रव्य से निकलती है तो इस प्रकाश तरंग का कुछ भाग एक ऐसी दिशा में प्रकीर्ण हो जाता है जो कि आने वाली प्रकाश तरंग की दिशा से अलग होता है।
 
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साइंस डे का मकसद नए छात्रों को विज्ञान के प्रति आकर्षित करना है

cv raman
इस प्रभाव में उस द्रव्य के वर्ग और उस ओर आने वाले प्रकाश में सीधा संबंध है। हम अपनी आंख के भीतर के द्रव्य के विषय में बात करेंगे तथा इस बात पर भी विचार करेंगे कि कैसे हम इसी आंख से अपने चारों ओर संसार को देखते हैं।

पर क्या रमन प्रभाव की भांति ही हमारी आंखों में पाए जाने वाले द्रव्यों के कारण हमारी आंखों के पर्दे पर संसार की विकृत छवि अंकित होती है। क्या ये प्रभाव हमें ये शिक्षा देता है कि भले ही हमें सब कुछ भिन्न दिखाई देता है परन्तु यथार्थ में वो एक ही है।

रमन प्रभाव ये कहता है कि जब प्रकाश की एक तरंग एक द्रव्य से निकलती है तो इस प्रकाश तरंग का कुछ भाग एक ऐसी दिशा में प्रकीर्ण हो जाता है जो कि आने वाली प्रकाश तरंग की दिशा से भिन्न है।

सात सालों तक चले अध्ययन के बाद रमन उस खोज पर पहुंचे,  जिसे हम 'रमन इफेक्ट' के नाम से जानी गई। उन्होंने 28 फरवरी, 1928 को इस खोज की घोषणा की थी। 1930 में उन्हें इस खोज के लिए नोबेल पुरस्कार भी मिला।  उनके इसी योगदान पर वर्ष 1987 से आज के दिन को भारत में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

नेशनल साइंस डे का मकसद नए छात्रों को विज्ञान के प्रति आकर्षित करना और उन्हें विज्ञान के प्रति सजग करना भी है। 
 
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