भारत और चीन के बीच फिर व्यापार हुआ शुरू।
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भारत और चीन के बीच सिक्किम के नाथुला दर्रे से सीमा व्यापार छह साल के अंतराल के बाद शनिवार को फिर शुरू हो गया। नो मैन्स लैंड में भारत और चीन के अधिकारियों ने उपहारों का आदान-प्रदान कर 2026 के व्यापार सत्र का औपचारिक उद्घाटन किया। इसके बाद शेराथांग व्यापार केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में पंजीकृत स्थानीय व्यापारियों को व्यापार पास वितरित किए गए।
सीमा व्यापार की बहाली के साथ नाथुला मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा भी फिर शुरू हुई है। सिक्किम सरकार ने इसे राज्य की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और सीमावर्ती क्षेत्रों की आजीविका के लिए महत्वपूर्ण बताया है। वाणिज्य एवं उद्योग, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री टीटी भूटिया ने कहा कि व्यापार मार्ग खुलने से स्थानीय उद्यमियों को हाथकरघा, हस्तशिल्प, जैविक उत्पाद और अन्य स्वीकृत वस्तुओं के बाजार तक पहुंच मिलेगी।
राज्य सरकार ने व्यापार सूची में नए उत्पाद शामिल करने और व्यापार की मात्रा बढ़ाने का प्रस्ताव विदेश व्यापार महानिदेशालय को भेजा है। व्यापारियों का कहना है कि मौजूदा सूची में याक की पूंछ, भेड़-बकरी की खाल, ऊन और कच्चा रेशम जैसी कई पुरानी वस्तुएं शामिल हैं, जबकि बाजार की जरूरत के मुताबिक नए उत्पादों को जगह मिलनी चाहिए। व्यापारियों ने रोजाना दो लाख रुपये की मौजूदा सीमा बढ़ाने की भी मांग की है।
अधिकारियों के अनुसार इस सत्र में करीब 38 व्यापारियों को पास जारी किए जा चुके हैं। मौजूदा व्यवस्था के तहत एक व्यापार सत्र में अधिकतम 400 व्यापार पास जारी किए जा सकते हैं। नाथुला से व्यापार सोमवार से गुरुवार तक होगा। सीमा द्वार भारतीय समयानुसार सुबह 7:30 बजे खुलेगा और शाम तक व्यापार जारी रहेगा। व्यापार बहाली के लिए सीमा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की मरम्मत का काम तेज गति से कराया गया था। सरकार ने स्थानीय व्यापारियों और सीमावर्ती गांवों को इसका प्रमुख लाभार्थी बनाने पर जोर दिया है। भारत-चीन ने 23 जून 2003 को नाथुला के जरिए सीमा व्यापार की अनुमति देने वाले समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। नाथुला भारत-चीन के बीच तीसरा सीमा व्यापार बिंदु है। अन्य दो उत्तराखंड का लिपुलेख और हिमाचल प्रदेश का शिपकी ला हैं।