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Supreme Court: 'यौन उत्पीड़न पर कानून की संकीर्ण व्याख्या से कमजोर होगा मकसद', सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

Thu, 11 Dec 2025 04:54 AM IST
पवन पांडेय अमर उजाला ब्यूरो

सार

Supreme Court: शीर्ष अदालत आईआरएस अधिकारी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें आईसीसी के नोटिस को चुनौती दी गई थी। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की 2004 बैच की एक अधिकारी ने आरोप लगाया था कि 15 मई, 2023 को आईआरएस अधिकारी ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न किया। 
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यौन उत्पीड़न मामले में पीड़िता के विभाग में गठित आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) किसी दूसरे विभाग के कर्मचारी के खिलाफ शिकायत पर यौन उत्पीड़न निवारण अधिनियम (पॉश) के तहत सुनवाई कर सकती है। शीर्ष अदालत ने कहा कि पॉश के प्रावधानों की संकीर्ण व्याख्या इसके सामाजिक कल्याणकारी मकसद को कमजोर कर देगी, इससे पीड़ित महिला के लिए अहम व्यावहारिक बाधाएं उत्पन्न होंगी।
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जस्टिस जेके माहेश्वरी व जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने कहा, पॉश अधिनियम की धारा 11 में निहित वाक्यांश, जहां प्रतिवादी कर्मचारी है का यह अर्थ नहीं निकाला जा सकता कि प्रतिवादी के खिलाफ आईसीसी की कार्यवाही सिर्फ प्रतिवादी के विभाग में गठित आईसीसी के समक्ष ही शुरू की जा सकती है। अदालत ने कहा कि संकीर्ण व्याख्या से पीड़ित महिला के लिए कई प्रक्रियात्मक और मनोवैज्ञानिक बाधाएं पैदा होंगी। 
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मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणी
यौन उत्पीड़न की शिकार महिला को प्रतिवादी के कार्यस्थल पर गठित आईसीसी के समक्ष शिकायत दर्ज कराने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इससे ऐसी स्थिति बनेगी, जहां पीड़ित महिला को कानूनी उपाय पाने के लिए आईसीसी के समक्ष किसी अन्य कार्यस्थल पर उपस्थित होना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि पीड़िता के कार्यस्थल पर गठित आईसीसी पॉश अधिनियम के तहत तथ्य-खोज जांच कर रही है, तो आरोपी के नियोक्ता को पॉश कानून की धारा 19(एफ) के तहत अपने कर्तव्यों का पालन करना होगा। फिर भले ही वह एक अलग विभाग हो। पीड़ित महिला के कार्यस्थल पर गठित आईसीसी के अनुरोध पर तुरंत सहयोग करना होगा और जानकारी देनी होगी।
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आईएएस अधिकारी पीड़िता ने लगाए थे आरोप  
शीर्ष अदालत भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के 2010 बैच के अधिकारी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें आईसीसी के नोटिस को चुनौती दी गई थी। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की 2004 बैच की एक अधिकारी ने आरोप लगाया था कि 15 मई, 2023 को आईआरएस अधिकारी ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न किया। तब खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग में संयुक्त सचिव पद पर तैनात पीड़िता के विभाग में गठित आईसीसी के समक्ष पॉश कानून के तहत शिकायत दर्ज कराई गई। आईआरएस अधिकारी ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) की प्रधान पीठ, नई दिल्ली में याचिका दायर की पर सीएटी ने याचिका खारिज कर दी। इसके बाद, उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने सीएटी के फैसले को बरकरार रखा।

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