गुजरात के नरोदा गाम नरसंहार मामले में तत्कालीन मजिस्ट्रेट एमएल नलकया ने कहा है कि सीनियर अधिकारी ने उन्हें कार सेवकों के शव वीएचपी नेता को सौंपने को कहा था। बुधवार को नरोदा गाम नरसंहार मामले की सुनवाई के लिए उपस्थित हुए एमएल नलकया ने आदलत को दिए एक पत्र में कहा, उन्होंने कारसेवकों के शव अपने सीनियर अधिकारी के आदेश पर वीएचपी नेता जयदीप पटेल को सौंपे थे। जयदीप पटेल नरोदा गाम मामले में मुख्य आरोपी हैं। और वर्तमान में जमानत पर रिहा हैं।
अयोध्या से लौटने वाले कार सेवकों की गोधरा में हत्या के बाद नरोदा में सांप्रदायिक दंगा भड़का था। इसमें ग्यारह मुसलमानों की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने 82 लोगों को अभियुक्त बनाया है जिनमें पूर्व गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी भी शामिल हैं।
तत्कालीन विभागीय मजिस्ट्रेट एमएल नलकया ने बताया, वह उस स्थान पर गए थे जहां गोधरा रेलवे स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस में आग लगाई गई थी। इसके बाद उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में शवों की शिनाख्त करने के साथ-साथ अन्य औपचारिकताओं को पूरा किया था।
गौरतलब है कि इसके पहले नरौदा पाटिया मामले में अपीलों की सुनवाई कर रही गुजरात उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने घटना स्थल का दौरा किया था ताकि वह मामले की बेहतर तरीके से समझ सके। घटना में कुल 97 लोग मारे गए थे जिनमें से ज्यादातर मुस्लिम थे। मामले में न्यायमूर्ति हर्ष देवनानी और न्यायमूर्ति एएस सुपेहिया अहमदाबाद के नरौदा पाटिया क्षेत्र में गए थे, जो साल 2002 में हुए गोधरा कांड के बाद हुए दंगों में सर्वाधिक प्रभावित इलाका था।
घटनास्थल पर पहुंचे न्यायाधीशों ने वहां दो घंटे बिताए थे, जिसके बाद न्यायमूर्ति हर्ष देवनानी और न्यायमूर्ति एएस सुपेहिया की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि वकीलों का अनुरोध तर्कपूर्ण है और वे नरौदा पाटिया में घटनास्थल का दौरा करेंगेे। अदालत ने आगे कहा कि जब से सुनवाई शुरू हुई है तब से ही दोनों पक्षों के वकीलों ने मामले को समझने के लिए अदालत से घटनास्थल का दौरा करने का अनुरोध करते रहे हैं।