सार
सीमा सुरक्षा में नारी शक्ति का दम लगातार बढ़ता दिख रहा है। अब महिला सैन्यकर्मी केवल सामान्य ड्यूटी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रेगिस्तान से लेकर बर्फीले बॉर्डर तक हर चुनौतीपूर्ण मोर्चे पर तैनाती को प्राथमिकता दे रही हैं। आधुनिक हथियारों और तकनीक में दक्ष महिलाएं हर भूमिका में खुद को साबित कर रही हैं, जिससे सुरक्षा बलों में उनकी भागीदारी और प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है।
भारतीय सेना में महिलाओं की संख्या में बढ़ोतरी
- फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में 'नारी शक्ति' के हौसले बुलंद हैं। सुरक्षा के मोर्चे पर महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। महिला सिपाही, सामान्य पोस्टिंग की बजाए रेगिस्तानी सीमा और बर्फीले बॉर्डर पर तैनाती को तवज्जो दे रही हैं। बीएसएफ/आईटीबीपी की कठोर ड्यूटी उनकी पहली पसंद बन रही है। पिछले पांच वर्षों में सीमा सुरक्षा बल, आईटीबीपी और असम राइफल्स में महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। हालांकि इस अवधि में सबसे ज्यादा महिलाएं बीएसएफ में भर्ती हुई हैं। पांच साल पहले बीएसएफ में 7,339 महिलाएं थीं, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 12,776 हो गया है।
हर मोर्चे पर खुद को किया साबित
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में सीमा प्रबंधन, आंतरिक सुरक्षा और चुनावी ड्यूटी के अलावा महिलाओं ने हर मोर्चे पर खुद को साबित कर दिखाया है। ग्रेनेड लांचर, रॉकेट लांचर, स्नाइपर राइफल और दूसरे अत्याधुनिक हथियारों के मामले में महिला जवान पूरी तरह पारंगत हो चुकी हैं। सीमा एवं आंतरिक सुरक्षा के अंतर्गत नाइट विजन यंत्र, मानव रहित हवाई वाहन, भू-भेदी रडार, एंटी ड्रोन उपकरण, माइन रोधी वाहन, बुलेटप्रूफ वाहन, डिजिटल रेडियो सेट, नेटवर्क इन बॉक्स और सैटेलाइट फोन आदि महिलाओं से अछूते नहीं हैं।
भर्ती प्रक्रिया में आवेदन शुल्क से छूट
गृह मंत्रालय ने जनवरी 2016 में यह निर्णय लिया था कि सीआरपीएफ और सीआईएसएफ में सिपाही स्तर के पदों का 33 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा। बीएसएफ और आईटीबीपी में सिपाही के स्तर के पदों का 14-15 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित होगा। महिला उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया के दौरान आवेदन शुल्क से छूट दी जाती है। भर्ती होने के बाद उन्हें करियर उन्नति में समान अवसर मिलते हैं।
पुरुष समकक्षों के बराबर नियुक्ति
महिलाओं को केंद्रीय सुरक्षा बलों और असम राइफल में सहायक कमांडेंट सहित उच्च पदों पर उनके पुरुष समकक्षों के बराबर नियुक्त किया जा रहा है। उन्हें नेतृत्व भूमिकाएं ग्रहण करने के समान अवसर प्रदान किए जाते हैं। गृह मंत्रालय का प्रयास है कि सेवा की परिस्थितियों में सुधार, स्थायित्व बढ़ाना और अधिकारियों के कैडर में महिलाओं के अधिक समावेश को बढ़ावा देना, इन सबके चलते सीएपीएफ में महिलाओं के उच्च और सतत प्रतिनिधित्व को बढ़ाने में अहम मदद मिलेगी।
लगातार बढ़ रहीं महिला जवान
| वर्ष |
महिला जवानों की संख्या |
| 2021 |
34,222 |
| 2022 |
35,074 |
| 2023 |
41,606 |
| 2024 |
42,470 |
| 2025 |
46,992 |
बीएसएफ में पांच साल में सबसे ज्यादा बढ़ी संख्या
| फोर्स |
2021 |
2022 |
2023 |
2024 |
2025 |
| सीआरपीएफ |
9,854 |
9,413 |
9,755 |
10,086 |
10,277 |
| बीएसएफ |
7,339 |
7,500 |
11,160 |
11,404 |
12,776 |
| सीआईएसएफ |
9,245 |
9,352 |
10,503 |
10,629 |
12,665 |
| आईटीबीपी |
2,386 |
2,713 |
3,753 |
3,722 |
4,522 |
| एसएसबी |
3,607 |
3,667 |
3,944 |
4,116 |
4,240 |
| एआर |
1,791 |
2,429 |
2,491 |
2,513 |
2,512 |
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