प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अनौपचारिक रूप से फिर मिलेंगे। यह मुलाकात साल के अंत तक कभी भी हो सकती है। भारतीय राजनयिक चीन के सहयोगियों के साथ मिलकर इसके रोड मैप की रूप रेखा तैयार कर रहे हैं। इससे पहले पीएम और राष्ट्रपति शी चीन में अनौपचारिक रूप से मिल सकते हैं।
इस बार राष्ट्रपति शी भारत आएंगे और देश के किसी शहर में इसके होने की संभावना है। राजनयिक सूत्रों का कहना है कि पीएम के शपथ ग्रहण समारोह के पूरा होने, सरकार के कामकाज संभालने के बाद इस रोड मैप पर तेजी से प्रगति होने की उम्मीद है। क्योंकि इस बारे में निर्णय शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व को ही लेना है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार चीन भारत मैं चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने के बाद जून में इस तरह के मुलाकात की संभावना का पक्षधर था, लेकिन भारत चाहता है कि मुद्दे, व्यापक होमवर्क, समझ के स्तर पर कार्य करके शिखर नेतृत्व की अनौपचारिक भेंट प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए।
ऐसे में संभावना है कि विदेश मंत्री स्तरीय दौरे में उच्च स्तरीय मैकेनिज्म की रूप रेखा तैयार होने के बाद यह भेंट संभव है। भारत और चीन दोनों देशों के राजनयिकों का मानना है कि दोनों शिखर नेताओं में एक नए वेवलेंथ पर आपसी संबंध, समझ, सहयोग की अवधारणा विकसित हुई है।
इसका आने वाले समय में सकारात्मक असर दिख सकता है। भारत सॉफ्टवेयर पावर में अग्रणी तो चीन हार्डवेयर में आगे है। चीन का बिग डाटा कार्यक्रम राष्ट्रपति शी की महत्वाकांक्षी योजना है और भारत इसमें चीन का अहम सहयोगी बन सकता है।