पार्टी सूत्रों का कहना है कि 2014 में नितिन गडकरी का नाम पीएम के दावेदारों की सूची से बाहर होने के बाद ही पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के साथ उनकी दूरी बढ़ गई थी। बाद में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद के लिए नितिन गडकरी आगे आ रहे थे तो एक बार फिर पहले की तरह उनकी राह रोक दी गई। राजनीति में उनके बहुत जूनियर रहे देवेंद्र फडणवीस को सीएम पद मिल गया। अब तीन राज्यों की पराजय के बाद नितिन गडकरी ने अपनी बात आगे बढ़ाने के लिए सही वक्त चुना है।
कहा जा रहा है कि कई सहयोगी दल जो मोदी-शाह के नाम पर एनडीए में आने से कतरा रहे हैं, वे गडकरी और राजनाथ सिंह जैसे नेताओं पर भरोसा कर कुनबे का हिस्सा बन सकते हैं। चूंकि सुष्मा स्वराज पहले ही कह चुकी हैं कि वे इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी। लिहाजा अब पीएम पद के एक बड़े दावेदार राजनाथ सिंह का रुझान किस ओर रहता है, यह देखने वाली बात होगी। आने वाले दिनों में यह भी साफ हो जाएगा कि गडकरी के साथ खुलकर कितने नेता सामने आ रहे हैं। इन सबसे एक बात तो साबित हुई है कि नितिन गडकरी 2019 में पीएम पद के लिए खुद की दावेदारी आगे बढ़ा रहे हैं।
'उन्हें' नितिन गडकरी का खुलकर बोलना पसंद नहीं
कहा जाता है कि पार्टी की बैठक हो या कैबिनेट की मीटिंग, नितिन गडकरी बहुत खुलकर बोलते हैं। वे सार्वजनिक मंच से भी पार्टी की अंदरुनी राजनीति का जिक्र कर जाते हैं। दो-तीन साल पहले गुरुग्राम में आयोजित एक कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गडकरी को बतौर मुख्य अतिथि बुलाया था। उसमें गडकरी ने पार्टी की नीतियों का जिक्र करते हुए कहा, ये खट्टर साहब हैं, जब मैं पार्टी अध्यक्ष था तो ये मेरे पास काम मांगने आते थे।
पार्टी के लिए मुझे कोई काम दीजिये। आज देखिये, ये मुख्यमंत्री हैं। हमारी पार्टी में कोई परिवार नहीं देखा जाता है, जो काम करता है, उसे फल मिलता है। ऐसे ही 2014 के चुनाव से पहले गडकरी ने एक बैठक में नीतिश कुमार से कहा, मेरी गारंटी है कि हम चुनाव से पहले किसी भी नेता का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए आगे नहीं लाएंगे। उस वक्त गडकरी पार्टी अध्यक्ष थे।
वे दूसरी बार पार्टी अध्यक्ष बनने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन कथित तौर पर एक घोटाले में नाम आने के कारण वे इससे वंचित रह गए। मंत्री रहते हुए भी वे कई बार अपने खुलेपन के लिए चर्चित रहे हैं। अब उनका यही अंदाज भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को रास नहीं आ रहा है। बताया जा रहा है कि नए साल में पार्टी नेतृत्व को कुछ दूसरे नेताओं का भी खुलापन देखने को मिल सकता है।