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नंदीग्राम उपचुनाव: भाजपा प्रत्याशी की उम्र पर उठे सवाल, हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित; विवाद क्यों?

Fri, 25 Sep 2026 11:12 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, कोलकाता।

सार

नंदीग्राम उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी हसीरानी रथ के चुनावी हलफनामे में उम्र और 1965 में 10वीं पास करने के उल्लेख को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाया है। इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। चुनाव आयोग ने कहा कि नामांकन की जांच पहले ही पूरी हो चुकी है और कथित गलत जानकारी अपने आप में उम्मीदवारी रद्द करने का आधार नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस याचिका से छह अक्तूबर के उपचुनाव का परिणाम प्रभावित नहीं होगा।
 
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कलकत्ता हाईकोर्ट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की उम्मीदवार हसीरानी रथ के चुनावी हलफनामे को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। कांग्रेस ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया है कि हलफनामे में रथ ने अपनी उम्र 60 साल से ज्यादा बताई है, जबकि उन्होंने 1965 में 10वीं की पढ़ाई पूरी करने की जानकारी दी है। कांग्रेस का कहना है कि दोनों जानकारियों के बीच उम्र को लेकर अंतर दिखाई देता है। इसी मामले पर शुक्रवार को सुनवाई पूरी होने के बाद जस्टिस कृष्ण राव ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
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कांग्रेस ने अदालत से क्या मांग की?
कांग्रेस की पश्चिम बंगाल प्रदेश इकाई का कहना है कि चुनाव आयोग को भाजपा प्रत्याशी की ओर से जमा किए गए हलफनामे और दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए थी। पार्टी ने अदालत से इन दस्तावेजों की जांच कराने का निर्देश देने की मांग की है। वहीं, चुनाव आयोग ने इस याचिका के अधिकार पर ही सवाल उठाया। आयोग का कहना है कि पश्चिम बंगाल कांग्रेस प्रदेश कमेटी को किसी उम्मीदवार के नामांकन की जांच को लेकर शिकायत करने का अधिकार नहीं है।

क्या कांग्रेस की आपत्ति समय पर उठाई गई थी?
  • चुनाव आयोग के वकील जिष्णु चौधरी ने कहा कि नंदीग्राम उपचुनाव के नामांकन की जांच 17 सितंबर को पूरी हो चुकी है। आयोग के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद इस स्तर पर उम्मीदवार के नामांकन को लेकर नई आपत्ति नहीं उठाई जा सकती।
  • आयोग ने यह भी कहा कि हलफनामे में कथित तौर पर गलत जानकारी होना अपने आप में नामांकन रद्द करने का आधार नहीं है। नामांकन तभी प्रभावित हो सकता है जब कोई गंभीर या ठोस कानूनी खामी सामने आए।
  • अदालत के सवाल पर आयोग ने उदाहरण देते हुए कहा कि अस्वस्थ मानसिक स्थिति या लाभ का पद रखने जैसी स्थितियां गंभीर दोष मानी जा सकती हैं।
  • आयोग की ओर से यह भी कहा गया कि हसीरानी रथ की उम्र या शैक्षणिक योग्यता चुनाव लड़ने के लिए बाधा नहीं है।
  • वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने कहा कि चुनाव लड़ने के लिए अधिकतम उम्र की कोई सीमा तय नहीं है, इसलिए उम्र से जुड़ा मुद्दा ऐसा दोष नहीं है जिससे उम्मीदवारी रद्द हो सके।
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हाईकोर्ट ने आयोग की दलील पर क्या कहा?
सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्ण राव ने कहा कि याचिकाकर्ता कथित गलत घोषणा के आधार पर नामांकन खारिज करने की मांग कर रहा है और यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। इसके जवाब में चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि उठाया गया मुद्दा इतना महत्वपूर्ण नहीं है, क्योंकि उम्मीदवार की उम्र या शैक्षणिक योग्यता से चुनाव लड़ने की पात्रता प्रभावित नहीं होती। आयोग ने यह भी दोहराया कि नामांकन की जांच की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

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अगर भाजपा उम्मीदवार जीत गईं तो क्या होगा?
उच्च अदालत ने यह भी कहा कि छह अक्तूबर को होने वाले नंदीग्राम उपचुनाव का परिणाम इस याचिका से प्रभावित नहीं होगा। जस्टिस राव ने कहा कि अगर हसीरानी रथ चुनाव जीतती हैं और बाद में अदालत को लगता है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने जांच के समय दस्तावेजों का सही सत्यापन नहीं किया था, तब भी उनकी जीत अपने आप रद्द नहीं होगी। ऐसी स्थिति में चुनाव को चुनौती देने के लिए अलग से चुनाव याचिका दाखिल करनी होगी। उम्मीदवार के वकील ने पिछली सुनवाई में भी कहा था कि चुनाव की घोषणा के बाद पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के नियमों के तहत चलती है और चुनाव से जुड़ी किसी आपत्ति को मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव याचिका के जरिए चुनौती दी जा सकती है।
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नंदीग्राम में क्यों हो रहा है उपचुनाव?
नंदीग्राम सीट 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद खाली हुई है। भाजपा के सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ भवानीपुर सीट से भी चुनाव जीता था। बाद में उन्होंने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम सीट छोड़ दी। इसी वजह से यहां छह अक्तूबर को उपचुनाव होना है। भाजपा ने इस सीट से हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। रथ, शुभेंदु अधिकारी के सहयोगी रहे चंद्रनाथ रथ की मां हैं। चंद्रनाथ रथ की इसी साल मई में यहां के पास मध्यमग्राम में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
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