महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने शनिवार को अपने इस्तीफे की खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जब पार्टी को हार का सामना करना पड़ता है तो इसके लिए सभी जिम्मेदार हैं। कांग्रेस नेता ने बताया कि उन्होंने कोई इस्तीफा नहीं दिया। उनका कार्यकाल तीन साल तक का था, लेकिन वे चार साल से पद पर बने हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपने इस्तीफे को पार्टी का आंतरिक मुद्दा बताया।
नाना पटोले ने कहा, "मैंने कोई इस्तीफा नहीं दिया। दरअसल, तीन साल का कार्यकाल था, लेकिन मैं यहां चार साल से हूं। यह पार्टी का आंतरिक मुद्दा है। सभी को पार्टी के लिए काम करने का मौका मिलना चाहिए। जब हमारी पार्टी जीती तो मैंने कभी इसका श्रेय नहीं लिया। ठीक इसी तरह जब पार्टी हारती है तो इसके लिए सभी जिम्मेदार हैं।"
पटोले ने खरगे को लिखी थी चिट्ठी
रिपोर्ट में ऐसा बताया गया था कि नाना पटोले ने कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को चिट्ठी लिखी थी। उन्होंने खरगे से संगठात्मक पद की जिम्मेदारी से मुक्त करने का अनुरोध किया था। आज महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने नाना पटोले के इस्तीफे की खबरों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि वह इससे इनजान हैं। वडेट्टीवार ने कहा कि पार्टी की जीत और हार के लिए शीर्ष नेतृत्व जिम्मेदार होता है। उन्होंने सुझाव दिया कि चुनावी असफलताओं ने पटोले के फैसले को प्रभावित किया है। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय दिल्ली में कांग्रेस के आलाकमान पर निर्भर करता है।
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा, "मैं इससे अंजान हूं। पार्टी की जीत और हार का श्रेय शीर्ष नेतृत्व को जाता है। संसद में हर कोई उन्हें (महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में) हार का श्रेय देता है। शायद इसी वजह से उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया है। दिल्ली में पार्टी के आलाकमान इसका निर्णय लेंगे।"
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन रहा खराब
बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में राज्य के कई शीर्ष नेता अपनी विधानसभा सीट बचाने में असफल रहे। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले भंडारा जिले के साकोली विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की, लेकिन वे केवल 208 मतों से ही विजयी रहे। महाराष्ट्र में विपक्षी दलों के गठबंधन महाविकास अघाड़ी (एमवीए) के घटक दल कांग्रेस ने 101 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें केवल 16 सीटों पर ही जीत मिली। महाराष्ट्र में कांग्रेस का यह अबतक का सबसे खराब प्रदर्शन था।
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