मैंगलोर में 21 मार्च को हुई थी आरटीआई कार्यकर्ता की मौत
कर्नाटक के मैंगलोर में हाल ही में एक आरटीआई कार्यकर्ता की हुई हत्या के पीछे 'नमो ब्रिगेड' की स्थापना करने वाले एक शख्स को मुख्य संदिग्ध माना जा रहा है। संदिग्ध की तलाश के लिए पुलिस ने अपनी खोजबीन शुरू कर दी है और जल्द ही उसे पकड़ने की उम्मीद कर रही है।
पुलिस के मुताबिक नमो ब्रिगेड के संस्थापक नरेश शिनोए (39) के मकान से महज 75 मीटर की दूरी पर आरटीआई कार्यकर्ता विनायक पांडुरंग बलिगा (51) की हत्या कर दी गई थी। नरेश कर्नाटक में संघ के करीबी माने जाते हैं और जांच के दौरान हत्या में शामिल जिन तीन लोगों के नाम सामने आए हैं उनके नरेश से भी संबंध हैं।
जांच के दौरान पुलिस ने गुरुवार को नरेश के मंगलौर स्थित आवास पर छापेमारी की। पुलिस ने बताया कि वह करीब एक हफ्ते से गायब है और उनका फोन भी बंद जा रहा है जिसकी वजह से उन पर शक करना लाजमी है।