ईसीआई को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी बीच शुक्रवार को कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भाजपा की प्रतिक्रिया पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास लगाए गए आरोपों के तथ्य और सबूत मौजूद हैं। जिन्हें राहुल गांधी कई प्रेस कॉन्फ्रेंस में सार्वजनिक कर चुके हैं। इसके साथ ही दावा किया कि 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।
प्रियंका गांधी ने क्या कहा?
प्रियंका गांधी ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, 'माफ कीजिए, यह बहुत पुरानी और कमजोर कहानी है। इसके लिए तथ्य और सबूत मौजूद हैं। पूरा देश इसे देख सकता है। मेरे भाई (राहुल गांधी) ने कई प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे दिखाया है। उन्होंने सबूत सबके सामने रखे हैं। अब यह बात बिल्कुल साफ है। 13 करोड़ वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं। यह एक बेतुका बहाना है। भाजपा को ऐसे बेतुके बहाने बनाना बंद कर देना चाहिए।
'कितने वर्षों से चुनावों में धांधली कर रहे?'
उन्होंने आगे कहा कि अगर वे हमारे चुनावों में दखल दे रहे हैं और अगर उनकी लीडरशिप चुनाव आयोग से ऐसा करवा रही है, तो यह देशद्रोह जैसा काम है। उन्हें इस बात का एहसास होना चाहिए। वे गैर-कानूनी काम कर रहे हैं। वे कितने वर्षों से चुनावों में धांधली कर रहे हैं? जाहिर है, वे हर समय बहुत ज्यादा आत्मविश्वास से भरे रहते हैं।
इसके बाद जब उनसे पूछा गया कि क्या कांग्रेस इसके खिलाफ किसी विरोध- प्रदर्शन की योजना बना रही है। तो इस पर उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि सीडब्लूसी की एक बैठक होने वाली है, जिसके लिए मुझे वापस जाना है। तो उस बैठक में ही तय किया जाएगा कि आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
सांसद संजय राउत ने कहा?
वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर राहुल गांधी की टिप्पणी पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा, 'राहुल गांधी का स्वभाव बहुत माफ करने वाला है। वे राष्ट्रीय हित में उन लोगों को माफ करना चाहते हैं जो सभी गलत कामों के लिए जिम्मेदार हैं। सत्ता में बैठे लोगों के आदेशों से चुनाव आयोग ने वोट चोरी की। चुनाव आयोग इसमें शामिल है। राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार को सरकारी गवाह बनने और उन सभी लोगों का नाम बताने का मौका दिया है जिन्होंने उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया। 2029 में इस देश में नई सरकार बनेगी और जिम्मेदार लोग जेल जाएंगे।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के कामकाज और फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार आपत्ति दर्ज कराई।