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न्यायिक सेवा में सफल उम्मीदवारों के नाम और रोल नंबर भी होंगे प्रकाशित

Wed, 27 Jul 2016 11:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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न्यायपालिका को और पारदर्शी बनाने के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली न्यायिक सेवा के तहत निचली अदालतों में न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति के लिए आयोजित होने वाली प्राथमिक और मुख्य परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों का न सिर्फ उनका क्रमांक(रोल नंबर) प्रकाशित किया जाना चाहिए बल्कि उनकेनाम भी प्रकाशित होने चाहिए।
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इसके अलावा शीर्ष अदालत ने और भी कुछ दिशानिर्देश दिए हैं। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने दिल्ली न्यायिक सेवा-2014 में अनियमितता के आरोप संबंधी याचिका का मंगलवार को निपटारा कर दिया।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी कहा कि दिल्ली न्यायिक सेवा परीक्षा में वस्तुनिष्ठï प्रश्नों के उत्तर केलिए अब पेन का इस्तेमाल होगा। अब तक सिर्फ पेंसिल की इजाजत थी, जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ की आशंका रहती थी।
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साथ ही पीठ ने कहा कि सूचना केअधिकार के तहत जांची गई उत्तर पुस्तिकाएं मुहैया कराई जानी चाहिए। साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट को उत्तर पुस्तिकाओं की जांच संजय सिंह और सुजाशा मुखर्जी मामले में दिए गए निर्देशों के तहत कराने के लिए कहा है। 

शीर्ष अदालत एक गैर सरकारी संगठन द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें दिल्ली न्यायिक सेवा परीक्षा, 2014 में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था। याचिका में कहा गया था कि तीन वर्ष बाद दिल्ली न्यायिक सेवा परीक्षा आयोजित की गई थी। 80 सीटों के लिए आयोजित प्रारंभिक परीक्षा में करीब 2000 छात्र बैठे थे।

700 छात्रों का मुख्य परीक्षा में बैठे थे। साक्षात्कार के लिए महज 15 छात्रों का चयन किया गया। 13 सामान्य वर्ग से जबकि दो आरक्षित वर्ग से हैं। याचिका में कहा गया था किसाक्षात्कार के लिए उन 68 न्यायिक अधिकारियों का चयन नहीं हुआ जो दूसरे राज्यों में चयनित हुए हैं। इनमें से 10 तो ऐसे हैं जिन्होंने दूसरे राज्यों की न्यायिक सेवा परीक्षा में टॉप किया है। 

जिसकेबाद सुप्रीम कोर्ट ने गत दिसंबर महीने में इस परीक्षा में सफल रहे 15 छात्रों को बेंचमार्क निर्धारित करते हुए सुप्रीम कोर्ट केपूर्व जस्टिस पीवी रेड्डïी को असफल रहे करीब 600 छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को पुन:मूल्यांकन करने के लिए कहा था।

कमेटी को इन उत्तर पुस्तिकाओं का पुन:मूल्यांकन कर यह पता लगाने के लिए कहा गया था कि क्या और लोगों का चयन हो सकता है या नहीं। जस्टिस रेड्डïी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इनमें से 12 अभ्यर्थी साक्षात्कार के लिए योग्य थे। 

इसकेबाद सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सेवा परीक्षा में सुधार लाने के लिए सुझाव मांगे थे। जिस पर याचिकाकर्ता संगठन के वकील प्रंशात भूषण ने छह सुझाव पेश किए। जिनमें से कुछ सुझावों को सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया। 
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