इरोम चानू शर्मिला के अचानक अनशन तोड़कर चुनाव लड़ने के निर्णय से उनके परिजन और सहयोगी हैरान हैं। हालांकि, माना जा रहा है कि इरोम के इस निर्णय के पीछे उनके ब्वाय फ्रेंड और लेखक डेसमंड कूटिंहो की भूमिका हो सकती है।
भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक 53 वर्षीय कूटिंहो सोशल एक्टिविस्ट भी हैं। वे दोनों लंबे समय से दूसरे के करीबी हैं और शादी करने वाले हैं। इरोम के संघर्ष में हमेशा उनके साथ रहने वाले उनके बड़े भाई सिंहजीत का कहना है उन्हें नहीं पता चला कि वह अपना अनशन तोड़ने जा रही है।
अस्वस्थ रहने के कारण उनकी पिछले कुछ दिनों से इरोम से बात नहीं हो सकी है। उन्हें अन्य लोगों के जरिए इरोम के अनशन तोड़ने के निर्णय के बारे में पता चला।
इरोम के लंबे समय से सहयोगी रहे गैर सरकारी संगठन ह्यमून राइट अलर्ट मणिपुर के निदेशक बबलू लोइतोंगबम ने कहा कि वह भी इस निर्णय से हैरान हैं। उन्होंने कहा कि वह इस निर्णय के पीछे कारण को समझ नहीं पा रहे हैं।
बबलू ने कहा कि यदि उनके अनशन से 15 साल में अफस्पा नहीं हटा तो यह अगले 30 सालों में भी नहीं हटेगा। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि उनको भी इरोम के इस निर्णय की जानकारी नहीं थी। सिंहजीत ने इरोम के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने लगातार उसको अनशन खत्म के लिए समझाने की कोशिश की थी लेकिन उसने उनकी कभी नहीं सुनी।
अंत में उन्होंने हार मान ली और वादा किया कि वह पूरे संघर्ष में उसके साथ रहेंगे। वह कहती थी कि वह अपना अनशन तभी तोड़ेगी जब अफस्पा को हटाया जाएगा। यह उसका वादा था। कोई नहीं जानता कि किस चीज ने उसे यह निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। शर्मिला के सहयोगी का कहना है कि संभव है कि उसके ब्रिटिश ब्वाय फ्रेंड ने अनशन तोड़ने के इस निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की होगी।