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G20: डिनर पार्टी से पहले दिखी देश की विरासत नालंदा विवि की झलक, पढ़ें कहानी दुनिया के पहले विश्विद्यालय की

Sat, 09 Sep 2023 08:59 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रात्रिभोज के लिए अतिथियों का स्वागत कर रहे हैं और यहां उनके ठीक पीछे बिहार स्थित नालंदा विश्वविद्यालय छवि दिखाई दे रही है। 
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जी20 सम्मेलन में दिखी नालंदा विश्वविद्यालय की झलक - फोटो : twitter
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विस्तार
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देश की राजधानी दिल्ली में चल रहे जी20 शिखर सम्मेलन में भारत की विरासत का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। पहले जब पीएम मोदी भारत मंडपम में अतिथियों का स्वागत कर रहे थे, तब वहां उनके पीछे कोणार्क सूर्य मंदिर के पहिये की प्रतिकृति लगाई गई थी, जिसके बारे में पीएम मोदी खुद मेहमानों को बता रहे थे। वहीं, अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रात्रिभोज के लिए अतिथियों का स्वागत कर रहे हैं और यहां उनके ठीक पीछे बिहार स्थित नालंदा विश्वविद्यालय छवि दिखाई दे रही है। प्रधानमंत्री को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक सहित जी20 के कुछ नेताओं को नालंदा विश्वविद्यालय के महत्व के बारे में समझाते हुए भी देखा गया।

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अधिकारियों ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय की विविधता, योग्यता, विचार की स्वतंत्रता, सामूहिक शासन, स्वायत्तता और ज्ञान साझा करना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के अनुरूप है। उन्होंने कहा, दुनिया के सबसे शुरुआती अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में से एक के रूप में प्रतिष्ठित, यह भारत की उन्नत शैक्षिक खोज की स्थायी भावना और भारत के जी20 प्रेसीडेंसी थीम, वसुधैव कुटुंबकम के अनुरूप एक सामंजस्यपूर्ण विश्व समुदाय बनाने की प्रतिबद्धता का एक जीवित प्रमाण है।
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दुनियाभर से नालंदा पढ़ने आते थे छात्र

बिहार के नालंदा में स्थित इस विश्वविद्यालय में आठवीं शताब्दी से 12वीं शताब्दी के बीच दुनिया के कई देशों से छात्र पढ़ने आते थे। इस विश्वविद्यालय में करीब 10 हजार छात्र पढ़ते थे, जो भारत के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा कोरिया, जापान, चीन, तिब्बत, इंडोनेशिया, फारस और तुर्की से आते थे। यहां करीब दो हजार शिक्षक पढ़ाते थे। इस विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम (450-470) ने की थी। नौवीं शताब्दी से बारहवीं शताब्दी तक इस विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त थी, लेकिन अब यह एक खंडहर बनकर रह चुका है, जहां दुनियाभर से लोग घूमने के लिए आते हैं।



नालंदा विश्वविद्यालय स्थापत्य कला का एक अद्भुत नमूना है

प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय स्थापत्य कला का एक अद्भुत नमूना है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस विश्वविद्यालय में तीन सौ कमरे, सात बड़े-बड़े कक्ष और अध्ययन के लिए नौ मंजिला एक विशाल पुस्तकालय था, जिसमें तीन लाख से भी अधिक किताबें थीं।

बेहद खूबसूरत था नालंदा विश्वविद्यालय

प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का पूरा परिसर एक विशाल दीवार से घिरा हुआ था, जिसमें प्रवेश के लिए एक मुख्य द्वार था। उत्तर से दक्षिण की ओर मठों की कतार थी और उनके सामने अनेक भव्य स्तूप और मंदिर थे। मंदिरों में बुद्ध भगवान की सुंदर मूर्तियां स्थापित थीं, जो अब नष्ट हो चुकी हैं। नालंदा विश्वविद्यालय की दीवारें इतनी चौड़ी हैं कि इनके ऊपर ट्रक भी चलाया जा सकता है।

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