नागपुर में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विदर्भ के सबसे बड़े शहर में हुई हिंसा की निंदा की है। उन्होंने इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस की ओर से समय पर कार्रवाई किए जाने पर इस घटना को रोका जा सकता था।
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डॉ. मोहम्मद औवेस हसन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "पिछले दो-तीन सालों में मुस्लिम समुदाय को भड़काने की कई कोशिशें की जा रही हैं। एक मंत्री लगातार औरंगजेब का मुद्दा उठा रहे हैं। मुस्लिम समुदाय का औरंगजेब से कोई संबंध नहीं है और वे शांत हैं।"
उन्होंने आरोप लगाया कि दक्षिणपंथी संगठनों ने इस्लामी आयतों वाली चादर जलाई, जिसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पुलिस से संपर्क कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि, जब पुलिस ने कोई कदम नहीं उठाया, तो उनमें से कुछ लोग भड़क गए।
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पुलिस के अनुसार, हिंसा के मुख्य आरोपी फहीम खान और पांच अन्य के खिलाफ देशद्रोह और सोशल मीडिया पर गलत सूचना फैलाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। हिंसा के तीन दिन बाद शहर के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू हटा लिया गया या उसमें ढील दी गई।
नागपुर की एक स्थानीय अदालत ने शहर में सोमवार को हुई हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार 17 लोगों को 22 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। आरोपियों को गुरुवार रात मजिस्ट्रेट मैमुना सुल्ताना के समक्ष पेश किया गया, जहां पुलिस ने उनकी सात दिनों की हिरासत मांगी।
इन लोगों को गणेशपेठ पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए अपराध “गंभीर प्रकृति के” हैं और इसलिए उनसे हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।