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Nagaland Killing: गलत पहचान मामले में 14 लोगों की हुई थी हत्या, ग्रामीणों के जेहन में आज भी ताजा हैं यादें

Sun, 04 Dec 2022 02:18 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोहिमा

सार

बीते साल दिसंबर माह में नगालैंड के मोन जिले में कथित तौर पर सुरक्षाबलों ने ग्रामीणों को उग्रवादी समझकर उन पर गोलियां चला दी थी। इस घटना में कम से कम 13 ग्रामीणों की मौत हो गई थी, जबकि 11 अन्य घायल हो गए थे।
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नगालैंड में 13 ग्रामीणों की मौत के बाद भड़की थी हिंसा - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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नगालैंड के मोन जिले में बीते साल दिसंबर में हुई घटना की यादें यहां के लोगों के जेहन में आज भी ताजा हैं। लोगों का कहना है कि उस घटना के बाद हम सेना के जवानों को माफ तो कर सकते हैं, लेकिन घटना को भूल नहीं सकते। 

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दरअसल, सेना के जवानों ने ग्रामीणों को उग्रवादी समझकर उन पर गोली चला दी थी। इस गलत पहचान के मामले में 14 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद ग्रामीणों और असम राइफल्स के जवानों के बीच झड़प की खबरें सामने आई थीं। 

दर्द और तकलीफ का अहसास आज भी
ओटिंग समुदाय के नेता खेतवांग कोन्याक बताते हैं कि उस घटना के बाद हम कई मायनों में आगे बढ़ चुके हैं, लेकिन दर्द और तकलीफ का अहसास आज भी है। हम माफ करना जानते हैं, लेकिन इस त्रासदी को नहीं भूल सकते। वहीं, उस हमले में बचे चोंगमेई कोन्याक कहते हैं कि सरकार ने घायलों की कोई वित्तीय मदद नहीं की। उन्होंने बस हमारे इलाज के खर्च का भुगतान किया। हममें से अधिकांश लोग पहले की तरह अपनी नौकरी पर लौटने में असमर्थ हैं और अब हम बहुत सारी वित्तीय समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हमले घटनास्थल वाली जगह को साफ कर दिया है और मारे गए लोगों की याद में वहां पर पत्थर की शिला स्थापित करने जा रहे हैं। 
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क्या हुआ था?
बीते साल दिसंबर माह में नगालैंड के मोन जिले मेंकथित तौर पर सुरक्षाबलों ने ग्रामीणों को उग्रवादी समझकर उन पर गोलियां चला दी थी। इस घटना में कम से कम 13 ग्रामीणों की मौत हो गई थी, जबकि 11 अन्य घायल हो गए थे। ये सभी ग्रामीण म्यांमार से सटे गांव ओटिंग के थे। घटना के बाद मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने शांति की अपील करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया था। इस घटना में एक सुरक्षा बल के जवान की भी मौत हुई थी।

जानकारी के अनुसार, तिरु-ओटिंग रोड पर एक गुप्त सूचना के आधार पर सुरक्षा बलों ने डेरा डाला था। इसी दौरान ग्रामीण उधर से आ गए थे, आरोप है कि गलती से सुरक्षा बलों ने उन्हें उग्रवादी समझ लिया और गोलियां बरसा दीं। इसमें कई लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल भी हो गए थे। सुरक्षाकर्मियों की ओर की गई कार्रवाई के बाद ग्रामीण आक्रोश में आ गए और सुरक्षाबलों का घेराव कर उनकी गाड़ी में आग लगा दी थी। मामले में नगालैंड सरकार ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। 

असम राइफल ने बिठाई थी कोर्ट ऑफ इंक्वायरी 
असम राइफल्स की ओर से घटना पर बयान जारी किया गया था। जिसमें कहा गया था कि उग्रवादियों के एक संभावित आंदोलन की खुफिया जानकारी के आधार पर सोम जिले में विशेष अभियान की योजना बनाई गई थी। इस दौरान हुई मौतों के कारण की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी बिठाई गई है। घटना पर असम राइफल्स ने खेद व्यक्त किया था। इस बीच नगालैंड के राज्यपाल जगदीश मुखी ने घटना की निंदा करते हुए कहा था कि एसआईटी इस घटना की हर एंगल से जांच करेगी।

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