नगालैंड में बीते दिनों सुरक्षा बलों की गोलीबारी में नागरिकों की हत्या के मामले में राज्य के मंत्री वी कशिहो संगतम ने रविवार को सेना पर गंभीर आरोप लगाए। संगतम ने कहा कि सेना 1958 से लोगों की हत्या करने और उन्हें डराने के लिए अफ्सपा (सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम) का दुरुपयोग कर रही है। संगतम ने कोन्याक यूनियन की ओर से आयोजित किए गए कैंडिल मार्च के दौरान कहा कि उत्तर-पूर्व के लोग इस कानून को हटाने की लंबे समय से मांग कर रहे हैं।
वह पूर्वी नागालैंड विधायक संघ (ईएनएलयू) की ओर से से बोल रहे थे, जो राज्य के 60 में से 20 विधायकों का प्रतिनिधित्व करता है। भूविज्ञान और खनन एवं मिट्टी और जल संरक्षण मंत्री संगतम ने कहा कि अफ्स्पा लागू होने के कारण हमारे लोगों ने इतने लंबे समय तक सुरक्षा बलों के हाथों अनकही पीड़ाओं और भेदभाव का सामना किया है। इस कानून के चलते हजारों लोगों की जान गई और कितने ही घरों में तोड़-फोड़ हुई लेकिन इसके विरोध की आवाज कोई नहीं सुन रहा है।
ओटिंग की घटना के बाद इस कानून के बारे में बताने के लिए शब्दों की जरूरत नहीं
मंत्री ने कहा कि अफ्स्पा कानून प्रभावित इलाकों में पैलामिलिट्री बलों को किसी भी परिसर की तलाशी लेने की, बिना वारंट के किसी को भी गिरफ्तार करने की और महज संदेह पर किसी को भी गोली मारने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि ओटिंग में जो दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई उसके बाद इस कानून के बारे में बताने के लिए शब्दों की जरूरत नहीं बची है। संगतम ने कहा कि यह कानून केवल दमनकारी और भेदभाव करने वाला है, इसके अतिरिक्त यह और कुछ भी नहीं है।
अफ्स्पा कानून को हटाने के लिए नगालैंड सरकार ने पारित किया एक कैबिनेट मेमो
संगतम ने आगे कहा कि नगालैंड सरकार ने अफ्स्पा को हटाने के लिए एक कैबिनेट मेमो पारित किया है। इसने हालिया गोलीबारी की घटना की जांच करने के लिए एक एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन किया है। एसआईटी को एक महीने के अंदर अपनी जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि ईएनएलयू ने ओटिंग के लोगों को आश्वासन दिया है कि मामले में पक्षपात रहित फैसला हो और दोषियों को कानून अनुसार सजा हो इसके लिए कदम उठाए गए हैं।