नागालैंड के किसानों पर इस वक्त दोहरी मार पड़ रही है। कोरोना की दूसरी लहर के साथ-साथ यहां बारिश नहीं होने से किसानों की अभी तक खेती शुरू नहीं हुई है। बुधवार को प्रदेश में सूखे जैसी स्थिति को लेकर राजधानी कोहिमा में कृषि उत्पादन आयुक्त ने कृषि और इससे जुड़े विभागों की बैठक ली। साथ ही किसानों के सामने आ रही चुनौतियों को खत्म करने पर विस्तार से चर्चा की। कृषि आयुक्त ने बताया कि कृषि और उससे संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ किसानों की समस्या पर चर्चा हुई है।
राज्य कृषि आयुक्त ने कहा कि राज्य की 70% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और कृषिकार्य से जुड़ी हुई है। हालांकि उन्होंने बताया कि देश और दुनिया इस वक्त कोविड महामारी से जूझ रही है। इसके बावजूद खेती की गतिविधियों को रोका नहीं जा सकता है।
चार सी फॉर्मूले पर जोर
दरअसल, राज्य में बारिश नहीं होने की वजह से किसानों के सामने चुनौती खड़ी हो गई है। पानी की कमी और ओलावृष्टि के कारण खेतों मं बीज अंकुरित नहीं हुए हैं। साथ ही सूबे के कई क्षेत्रों में जंगली जानवरों ने फसल को प्रभावित किया है। इससे किसान खासे परेशान दिख रहे हैं। किसानों के माथे पर चिंता की लकीर दिख रही है कि कैसे इससे इस चुनौती को निपटा जाएगा। कृषि आयुक्त ने चार c - सहयोग, समन्वय, आत्मविश्वास और योगदान की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। साथ ही जल संरक्षण और जल संचयन की विशेषता पर भी जोर दिया। इसके अलावा कोरोना संक्रमण से बचने के लिए कई दिशा निर्देश जारी किए गए।