केंद्र सरकार ने समूचे नगालैंड को अगले छह महीनों के लिए अशांत क्षेत्र घोषित कर दिया। इससे वहां विवादस्पद अफ्स्पा कानून लागू रहेगा, जिससे सुरक्षा बलों को कही भी अभियान चलाने व किसी को बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार है। नगालैंड में सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून (अफ्स्पा) कई दशकों से लागू है।
केंद्रीय गृहमंत्रालय ने बुधवार को अधिसूचना जारी कर कहा, सरकार का मानना है कि पूरा नगालैंड ऐसी अशांत व खतरनाक स्थिति में है कि वहां नागरिक प्रशासन की मदद के लिए सशस्त्र बलों का इस्तेमाल जरूरी है।
नया आदेश 30 दिसंबर, 2020 से छह महीने की अवधि के लिए प्रभावी होगा। मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, राज्य के विभिन्न हिस्सों में लूट, हत्याएं और जबरन वसूली की घटनाओं को देखते हुए यह फैसला किया गया।
दरअसल, पूर्वोत्तर के साथ साथ जम्मू-कश्मीर के विभिन्न संगठन अफ्स्पा हटाने की मांग करते रहे हैं। उनका आरोप है कि इस कानून से सुरक्षा बलों को व्यापक अधिकार मिलता है।
2015 में पीएम मोदी की मौजूदगी में नगा विद्रोही समूह एनएससीएन आईएम के महासचिव टी मुइवा और सरकार के वार्ताकार आर एन रवि के बीच समझौते के बावजूद अफ्स्पा को वापस नहीं लिया गया था। नगालैंड में शांति प्रक्रिया कुछ समय से अटकी हुई है क्योंकि एनएससीएन आईएम अलग झंडे और संविधान की मांग पर जोर दे रहा है, जबकि केंद्र ने इसे खारिज कर दिया है।