असम और नगालैंड के बीच एक भूभाग में प्राकृतिक संसाधनों को लेकर बात हो रही है। इस मामले में केंद्र को भी जानकारी दी गई है। ताजा घटनाक्रम में नगालैंड के सीएम नेफ्यू रियो ने कहा है कि दोनों राज्यों के बीच रॉयल्टी का बंटवारा 50-50 होगा। उन्होंने कहा कि विवादित क्षेत्र बेल्ट पर मालिकाना हक मामले में अंतिम फैसला अदालत को करना है।
दीमापुर: नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने कहा है कि विवादित क्षेत्र बेल्ट (Disputed Area Belt या डीएबी) में प्राकृतिक संसाधनों की खोज और इसके इस्तेमाल के लिए 50-50 रॉयल्टी शेयर करनी होगी। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के अलावा कोबाल्ट और निकल जैसे समृद्ध खनिजों के विशाल भंडार हैं। ये खनिज आधुनिक प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण हैं। इनका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन, कंप्यूटर और अन्य गैजेट्स में किया जाता है। इन संसाधनों का मूल्य अरबों डॉलर में आंका जाता है।
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असम सरकार ने कच्चे तेल की तलाश शुरू की
नगालैंड के सीएम की यह टिप्पणी इसलिए भी अहम है क्योंकि पड़ोसी राज्य असम की सरकार ने दिस्सोई घाटी में कच्चे तेल की तलाश शुरू की है। नगालैंड इस इलाके को त्सुरांग कहता है। कथित तौर पर यह भूभाग डीएबी के अंतर्गत आता है। नगालैंड के सीएम ने कहा कि वे इस संबंध में केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय (MHA) और असम सरकार के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि वे असम को बता चुके हैं कि कच्चे तेल की खोज और दोहन का काम शुरू हो जाना चाहिए।
दोनों राज्यों के बीच ऐसे बंटेगी रॉयल्टी
हालांकि, मुख्यमंत्री रियो ने यह भी कहा कि विवादित क्षेत्र से जितना भी संसाधन निकाला जाएगा, उसकी रॉयल्टी दोनों राज्यों के बीच 50-50 अनुपात में बांटी जाएगी। जिस भूभाग को लेकर स्पष्टता नहीं होगी, वहां मिलने वाले खनिज/संसाधन के मूल्य को एस्क्रो खाते में रखा जाएगा। बाद में इसके समाधान को लेकर बातचीत होगी, जिसके बाद ही रॉयल्टी साझा की जाएगी।
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नगालैंड सरकार को अदालत के आदेश का इंतजार
उन्होंने कहा कि नगालैंड सरकार कैबिनेट स्तर पर इस मामले की चर्चा कर चुकी है। अब विवादित क्षेत्रों के स्वामित्व का निर्धारण करने के लिए अदालत के आदेश का इंतजार है। अंतरिम आदेश में अदालत ने पहले नगालैंड के पक्ष में फैसला दिया था, लेकिन अंतिम फैसला अभी भी लंबित है।