नागालैंड का सबसे सशस्त्र विद्रोही समूह एनएससीएन-आईएम (नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड- इसाक-मुइवा) ने कहा कि बिना अलग झंडे और संविधान के भारत की केंद्र सरकार के साथ शांति समझौते का सम्मानजनक समाधान नहीं निकलेगा।
एनएससीएन-आईएम की साझा काउंसिल बैठक ने शुक्रवार को नागा लोगों के राजनैतिक और ऐतिहासिक अधिकारों पर और भारत-नागा राजनैतिक वार्ता पर विचार-विमर्श किया। ये बैठक नागालैंड में दीमापुर के पास हर्बन में केंद्रीय मुख्यालय में हुई।
एनएससीएन-आईएम का ये कठोर रुख ऐसे समय में आया है जब नागालैंड के राज्यपाल और वार्ताकार आरएन रवि के बीच मतभेदों के कारण शांति वार्ता गतिरोध का सामना कर रही है। एनएससीएन-आईएम ने एक बयान में कहा कि सभा ने सर्वसम्मित से इस प्रस्ताव को पारित किया है, जो एनएससीएन-आईएम के कथन को दोहराता है।
विद्रोह समूह चाहता है कि नागा राष्ट्रीय झंडा और संविधान, भारत-नागा राजनैतिक समाधानों का हिस्सा जरूर बनें और सौदे को सम्मानजनक और स्वीकार्य के रूप में योग्य बनाएं। इस बयान में यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार और एनएससीएन-आईएम अंतिम सहमति पर जरूर पहुंचे जो कि तीन अगस्त 2015 को ऐतिहासिक फ्रेमवर्क समझौते पर किए गए हस्ताक्षर पर आधारित हो।
पिछले महीने एनएससीएन-आईएम ने दावा किया था कि केंद्र ने नागा लोगों की संप्रभुता को मान्यता दी थी। साल 2015 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसमें इस बात पर सहमति जताई गई थी कि नागा लोग सह-अस्तित्व में रहेंगे लेकिन भारत में विलय नहीं करेंगे।
हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि दूसरे नागा सशस्त्र समूह नागा राष्ट्रीय राजनैतिक समूह ने कहा है कि वो शांति समझौते पर बिना अलग झंडे और संविधान की मांग के हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हैं।