पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में किशोरी से दुष्कर्म और हत्या के मामले में सीएम ममता बनर्जी अपने बेतुके बयान पर घिर गई हैं। 2012 में सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की पीड़िता निर्भया की मां ने ममता के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। एनसीपीसीआर के सदस्य सचिव की अध्यक्षता वाली टीम मामले में जांच की स्थिति को समझने और परिवार के सदस्यों के साथ-साथ संबंधित हितधारकों के साथ बातचीत करने के लिए 13-15 अप्रैल तक नादिया का दौरा करेगी।
निर्भया की मां ने कहा कि अगर ममता बनर्जी इतनी असंवेदनशील हैं तो फिर उन्हें सीएम के पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। अगर वह एक पीड़िता के बारे में इस तरह का बयान देती हैं तो वह सीएम पद के योग्य नहीं हैं। निर्भया की मां ने कहा कि इस घटना की सही ढंग से जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। इस तरह के बयान ऐसे अपराधों को बढ़ावा देने का काम करते हैं। इससे पीड़ित प्रभावित होते हैं और अपराधियों को बढ़ावा मिलता है। ऐसे नेताओं को सिर्फ अपने वोटबैंक की ही चिंता रहती है।
ममता बनर्जी ने उठाए थे सवाल
टीएमसी नेता से जुडे़ इस मामले पर ममता बनर्जी ने सवाल उठा दिए थे। ममता बनर्जी ने कहा था, आपको कैसे पता कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ, क्या वह गर्भवती थी या लव अफेयर का मामला था या फिर वह बीमार थी। अगर कोई कपल रिलेशनशिप में है तो हम उन्हें कैसे रोक सकते हैं, यह यूपी नहीं है जहां लव जिहाद के नाम पर हम कुछ भी कर दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल आयोग को इस मामले की जांच सौंपी जानी है। यह निजी आजादी का मामला है। अगर कोई भी गड़बड़ी हुई है तो फिर दोषियों को पुलिस गिरफ्तार करेगी। एक संदिग्ध को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
राष्ट्रीय महिला आयोग अध्यक्ष ने साधा ममता पर निशाना
राष्ट्रीय महिला आयोग अध्यक्ष रेखा शर्मा ने हंसखाली बलात्कार-हत्या घटना पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि एक महिला होने के नाते उसे दूसरी महिला का दर्द समझना चाहिए। उसने पीड़िता पर उंगली उठाई, यह गलत है।
राज्यपाल धनखड़ ने भी कसा तंज
ममता की टिप्पणी पर तंज कसते हुए राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा कि अगर अधिकार वाले लोग ही निर्णयात्मक रुख दिखाने लगे तो जांच प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस तरह के दृष्टिकोण निष्पक्ष जांच में बाधा डाल सकते हैं। कई मुद्दों पर राज्य में टीएमसी सरकार के साथ टकरा चुके धनखड़ ने यह भी कहा कि यह कानून के खिलाफ निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच में बाधा डालता है क्योंकि पुलिस को इस तरह की लाइन पर चलने के लिए मजबूर किया जाता है। ममता बनर्जी ने लड़की की मौत के कारण पर संदेह व्यक्त किया था, हालांकि उसके परिवार ने इसे सामूहिक दुष्कर्म करार दिया था और सवाल उठाया था कि क्या कक्षा 9 की छात्रा की मौत किसी के द्वारा थप्पड़ मारने से हुई होगी।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मामला सीबीआई को सौंपा
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के हंसखली में एक नाबालिग लड़की के कथित दुष्कर्म और मौत की जांच राज्य पुलिस से सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके। आदेश पारित करते हुए मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि तथ्य यह है कि कोई पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं है और कोई मृत्यु प्रमाण पत्र पूरी घटना को दबाने और सबूत मिटाने के प्रयास के बारे में संदेह पैदा नहीं करता है। मामले की परिस्थितियों में और कानूनी स्थिति पर विचार करने के बाद हमारी राय है कि मामले में निष्पक्ष जांच करने और पीड़ित के परिवार के सदस्यों और इलाके और राज्य के निवासियों का विश्वास पैदा करने के लिए स्थानीय पुलिस के बजाय सीबीआई द्वारा जांच की जानी चाहिए।
एनसीपीसीआर करेगी गांव का दौरा
मंगलवार को एक बयान के अनुसार, शीर्ष बाल अधिकार निकाय एनसीपीसीआर की दो सदस्यीय टीम नाबालिग लड़की के परिवार का दौरा करेगी। बयान में कहा गया है कि एनसीपीसीआर के सदस्य सचिव की अध्यक्षता वाली टीम मामले में जांच की स्थिति को समझने और परिवार के सदस्यों के साथ-साथ संबंधित हितधारकों के साथ बातचीत करने के लिए 13-15 अप्रैल तक नादिया का दौरा करेगी। एनसीपीसीआर ने कहा कि इस संबंध में नादिया के एसपी को जांच रिपोर्ट जमा करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं। , उसके माता-पिता के अनुसार लड़की के साथ 4 अप्रैल को एक स्थानीय टीएमसी नेता के आवास पर एक जन्मदिन की पार्टी में दुष्कर्म किया गया था, उस रात बाद में उसकी मौत हो गई थी।
कांग्रेस पार्षद हत्या के गवाह की मौत मामले में सीबीआई जांच के आदेश
इस बीच कलकत्ता हाई कोर्ट ने निरंजन वैष्णव की मौत की सीबीआई जांच का मंगलवार को आदेश दिया। माना जाता है कि वह कांग्रेस पार्षद तपन कंडू की पुरुलिया जिले में की गई हत्या का प्रत्यक्षदर्शी था। न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की एकल पीठ ने आदेश दिया कि मामले के कागजात केंद्रीय एजेंसी को सौंपे जाएं, जो पहले से ही उच्च न्यायालय के आदेश पर पार्षद की हत्या की जांच कर रही है। कंडू की विधवा पूर्णिमा ने वैष्णव की मौत की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग करते हुए दावा किया था कि इसका सीधा संबंध झालदा नगर पालिका में कांग्रेस पार्षद की हत्या से है।