सूचना का अधिकार कानून में हुए बदलाव पर विपक्ष हमलावर है। उसका कहना है कि सरकार आम आदमी को मजबूती देने वाले कानून को कमजोर कर रही है। लेकिन बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने विपक्ष के इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि सरकार आम आदमी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। राष्ट्रीय सूचना आयुक्त के चयन में मुख्य विपक्षी दल को शामिल कर सरकार ने यह साबित भी किया है कि वह सबकी आवाज को महत्त्व देना चाहती है।
जेपी नड्डा ने कहा कि आरटीआई संशोधन विधेयक 2019, आरटीआई की धारा 27 में कुछ बदलाव करने के लिए हुई है जिससे समय-समय पर कानून में केंद्र के द्वारा जरुरी बदलाव किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह संशोधन आरटीआई एक्ट को किसी भी तरह से कमजोर नहीं करता। केंद्र सरकार ने आरटीआई एक्ट को मजबूत करने के लिए चौबीसों घंटे काम करने वाला ऐप बनाया है। इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति कहीं से भी कभी भी कोई सूचना मांग सकता है। इससे आम आदमी की सूचना पाने की ताकत बढ़ी है।
वहीं, विपक्ष ने सूचना के अधिकार कानून में बदलाव को कानून को कमजोर करने की साजिश बताया है। उसका कहना है कि सरकार आम आदमी को उसके सवाल पूछने के अधिकार से वंचित रखना चाहती है जिसके लिए कानून में बदलाव किया जा रहा है। सूचना का अधिकार कानून 2005 में यूपीए सरकार के द्वारा लाया गया था जो सामान्य लोगों के द्वारा अपने हितों से जुड़ी जानकारी पाने के मामले में बड़ा उपयोगी साबित हुआ है।