कर्नाटक में मैसूर दशहरा उत्सव को लेकर जारी विवाद नहीं थम रहा है और लगातार इसे लेकर बयानबाजी हो रही है। अब पूर्ववर्ती मैसूर राजपरिवार भी कर्नाटक सरकार के फैसले के विरोध में खुलकर सामने आ गया है। पूर्ववर्ती मैसूर राजघराने की सदस्य प्रमोदा देवी वाडियार ने एक बयान जारी कर कर्नाटक सरकार पर निशाना साधा है और खासकर डीके शिवकुमार के बयान से आपत्ति जाहिर की है।
'चामुंडेश्वरी हिंदू मंदिर नहीं तो मुजराई विभाग के अंतर्गत क्यों?'
प्रमोदा देवी वाडियार ने बयान में कहा कि 'कर्नाटक सरकार के प्रस्तावित दशहरा उत्सव और खासकर चामुंडेश्वरी मंदिर और चामुंडेश्वरी पहाड़ी के मुद्दे पर काफी राजनीति हो रही है, जो बेहद परेशान करने वाली है। इस साल के नाद उत्सव (जनता दशहरा) के लिए सम्मानित लोगों के चुनाव पर मतभेद हैं। हालांकि ये कहना कि चामुंडेश्वरी मंदिर हिंदू धर्म से नहीं जुड़ा है, यह पूरी तरह से गैरजरूरी है और इसे सही नहीं ठहराया जा सकता। मंदिर में पूजा हिंदू धर्म की मान्यताओं और परंपराओं से होती है। अन्य धर्म के लोगों को मंदिर में आने की हमेशा छूट रही है और अभी भी है। लेकिन अगर ये हिंदू मंदिर नहीं है तो इसे कभी भी मुजराई विभाग के अंतर्गत नहीं रखा जाता।'
डीके शिवकुमार के बयान से जताई नाराजगी
प्रमोदा देवी वाडियार का यह बयान ऐसे समय आया है, जब हाल ही में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि चामुंडेश्वरी मंदिर केवल हिंदुओं की संपत्ति नहीं है। इस साल मैसूर दशहरा के उद्घाटन समारोह में मशहूर लेखिका बानू मुश्ताक को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किया गया है। जिसपर भाजपा और कई हिंदूवादी संगठनों ने आपत्ति जताई। भाजपा की आपत्ति पर राज्य के गृह मंत्री ने कहा कि मैसूर दशहरा कार्यक्रम का आयोजन कर्नाटक सरकार करती है और यह किसी धर्म विशेष का आयोजन नहीं है। इसके बाद डीके शिवकुमार ने भी ऐसा बयान दिया, जिसने कई लोगों को नाराज कर दिया है।
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मैसूर राजपरिवार ने कहा- निजी तौर पर निभाएंगे धार्मिक परंपराएं
कर्नाटक में मुजराई विभाग राज्य में मंदिरों का प्रबंधन करता है। प्रमोदा देवी वाडियार ने आगे लिखा कि हमारा मानना है कि सरकार का दशहरा उत्सव एक सांस्कृतिक कार्यक्रम है। सरकार किसी भी धार्मिक संप्रदाय को इसे मनाने की अनुमति नहीं देती है, और ऐसा उत्सव धार्मिक पवित्रता, परंपरा या विरासत का दावा नहीं कर सकता। इसी कारण, कर्नाटक सरकार द्वारा आयोजित उत्सव सांस्कृतिक कार्यक्रम हैं, न कि धार्मिक।
मैसूर राजपरिवार के बयान में कहा गया है कि वे पीढ़ियों से चले आ रहीं धार्मिक परंपराओं और पूजा अनुष्ठान को निजी तौर पर महल के अंदर और बाहर जारी रखेंगे। सरकार द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम महल के सामने आयोजित किए जाते हैं, इसलिए हमारे पारंपरिक समारोहों के समय के साथ इसका टकराव न हो, इसके लिए सरकार शुभ और उपयुक्त समय निर्धारित करे।