एनआईए ने पिछले दिनों अपनी चार्जशीट में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक सहित छह यूक्रेनी नागरिकों पर लगी यूएपीए की धारा हटा ली थी। उसके बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी की स्पेशल कोर्ट ने शुक्रवार को अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरन वैनडाइक को जमानत दे दी। हालांकि अदालत ने कहा था कि मैथ्यू दिल्ली से बाहर नहीं जाएगा। वह जांच में सहयोग करेगा।
विशेष अदालत ने एक लाख रुपये के बेलबॉन्ड और एक लाख रुपये की श्योरिटी पर आरोपी को जमानत दी थी। बुधवार को इस केस में शामिल छह यूक्रेनी नागरिकों, हुरबा पेट्रो, स्लीवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफनकिव मारियन, होंचारुक मक्सिम और कामिन्स्की विक्टर को भी जमानत मिल गई है।
यूक्रेनी नागरिकों को एक-एक लाख के कैश बॉन्ड पर मिली डिफॉल्ट जमानत
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 6 यूक्रेनी नागरिकों को एक-एक लाख रुपये के कैश बॉन्ड पर डिफॉल्ट जमानत दी है। एफआरआरओ के सामने मामले के निपटारे (कंपाउंडिंग) के आधार पर कोर्ट ने उन्हें इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया है।
एफआरआरओ ने हर आरोपी पर 5.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। एनआईए की विशेष कोर्ट ने मैथ्यू एरॉन वैनडाइक पर लगाई गई जमानत की शर्त में भी बदलाव किया है। उन्हें एक लाख रुपये का श्योरिटी बॉन्ड जमा करने से छूट दे दी है। उन्हें एक लाख रुपये के कैश बॉन्ड पर रिहा किया जाएगा।
विदेशी नागरिकों के केस से हटाई गईं यूएपीए की धारा
पिछले दिनों मैथ्यू सहित सात विदेशी नागरिकों के मामले में एनआईए ने जो चार्जशीट दाखिल की थी, उसमें सभी आरोपियों के खिलाफ 'गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 'यूएपीए' की धारा 18' हटा ली गई थी। चार्जशीट में केवल 'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट', 2025 की धारा 21 व 23 लिखी थी। ये दोनों धाराएं फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस के स्तर पर समझौता योग्य अपराध की श्रेणी में आती हैं।
मैथ्यू एरन वैनडाइक सहित सात विदेशी नागरिकों पर आतंकी गतिविधियों की साजिश रचने और उग्रवाद से संबंधित कैंप आयोजित करने जैसे गंभीर आरोप लगे थे। एनआईए के आरोपों में कहा गया था कि ये सभी विदेशी नागरिक, म्यांमार के जातीय समूहों के संपर्क मे थे। वहां पर ये लोग, समूहों के सदस्यों को ड्रोन एवं घातक हथियार चलाने की ट्रेनिंग दे रहे थे। विदेशी नागरिकों पर यह आरोप भी लगा था कि इन्होंने दूसरे मुल्कों से जातीय समूहों के लिए ड्रोन का इंतजाम किया था।
अमेरिकी नागरिक को मिली जमानत से खुला रास्ता
एनआईए की स्पेशल कोर्ट 'राऊज एवेन्यू' ने जब अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरन वैनडाइक को डिफॉल्ट बेल दी, तब कोर्ट ने यह बात साफ कर दी थी कि इस मामले में गिरफ्तार अन्य छह युक्रेनी नागरिकों के पास भी जमानत लेने का अधिकार है। वजह, एनआईए ने अपनी चार्जशीट में उक्त सभी आरोपियों के खिलाफ लगी यूएपीए की धारा हटा ली थी। हालांकि जांच एजेंसी का कहना था कि यूएपीए के एंगल से जांच जारी रहेगी। आगे सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के वकील रोहित डंडरियाल, जिन्होंने एनआईए की विशेष अदालत के समक्ष आरोपियों का पक्ष रखा, ने इस केस में जांच एजेंसी पर सवाल खड़े किए थे। जब चार्जशीट दाखिल हुई, तब वकील ने कहा था कि आरोपियों को 180 दिन पहले पकड़ा गया था। उस वक्त जांच एजेंसी ने आतंकी साजिश की बात कही थी। वकील की दलील थी कि वे लोग घूमने आए थे। उनके पास सभी तरह के दस्तावेज थे। इसके बावजूद उन्हें तीस दिन की न्यायिक हिरासत में रखा गया। उसके बाद वह अवधि 90 दिन तक बढ़ा दी गई।
जांच एजेंसी ने कोर्ट में दी थी क्या दलील?
केस की सुनवाई में जांच एजेंसी के वकील का कहना था कि अभी वायस सैंपल आदि लेने हैं। कई दूसरे पहलुओं से केस की जांच होनी है। इस आधार पर 90 दिन का अतिरिक्त समय मांगा गया। आरोपियों के वकील ने दावा किया था कि 180 दिन की जांच के बाद भी एनआईए को यूएपीए जैसा अपराध नहीं मिला।
जांच एजेंसी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि चार्जशीट में यूएपीए की धाराएं नहीं लगाई गई हैं। हालांकि जांच एजेंसी की तरफ से कहा गया कि इस केस में यूएपीए के एंगल से जांच खत्म नहीं हुई है। फिलहाल इस धारा को जांच में पेंडिंग रखा गया है। आगे की जांच में अगर यूएपीए के तहत कोई अपराध बनता है तो राष्ट्रीय जांच एजेंसी, सप्लीमेंट्री आरोप पत्र दायर कर सकती है।