म्यांमार और थाईलैंड में आए विनाशकारी भूकंप में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है और इस आपदा को झेलने वाले लोग अभी भी उस सदमे से नहीं उबर पाए हैं। बैंकॉक से लौटे कुछ भारतीय पर्यटकों ने भी आपबीती बताई और बताया कि भूकंप के वक्त वहां के हालात कैसे थे?
शुक्रवार को म्यांमार में आए 7.2 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। इस भूकंप के झटके थाईलैंड तक महूसस किए गए। इस भूकंप से म्यांमार में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ है। अकेले म्यांमार में इस भूकंप से अब तक 694 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और सैंकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। थाईलैंड में 10 लोगों की मौत की खबर है। इस आपदा के चलते म्यांमार में आपातकाल लागू कर दिया गया है।
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'भूकंप के बाद सब कुछ थम गया था'
भूकंप के बाद बड़ी संख्या में पर्यटक थाईलैंड से निकल आए हैं। इनमें कई भारतीय पर्यटक भी हैं। इन्हीं पर्यटकों में से कुछ शुक्रवार की रात कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचे तो उन्होंने मीडिया से बातचीत में थाईलैंड के हालात बयां किए और बताया कि भूकंप के बाद वहां कैसे हालात थे। एक रंजन बनर्जी नाम के भारतीय पर्यटक ने बताया कि फिलहाल थाईलैंड में हालात सामान्य हैं, लेकिन जब भूकंप के झटके महसूस हुए तो वहां सबकुछ बंद हो गया था। रंजन ने बताया कि जब भूकंप आया तो वहां आपात जैसे हालात थे। सभी शॉपिंग मॉल्स और ऑफिस से लोगों को निकाला गया और सबकुछ बंद कर दिया गया। मेट्रो रेल सिस्टम को भी रोक दिया गया।
'लोग डर के मारे सड़कों पर भागते दिखे'
एक अन्य यात्री सफदर ने बताया कि जैसे ही भूकंप आया तो ऊंची-ऊंची इमारतें हिलने लगीं। सार्वजनिक परिवहन को बंद कर दिया गया और कुछ घंटे तक सबकुछ थम गया था। सफदर ने बताया कि भूकंप के वक्त वह सड़क पर था और लोग डर के मारे सड़कों पर भाग रहे थे। लोगों को लगा कि इमारतें गिर जाएंगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। बैंकॉक से लौटे एक अन्य भारतीय पर्यटक संजीव दत्ता ने बताया कि 'भूकंप के वक्त उनका बेड हिलने लगा था, जब मैंने उठकर देखा तो इमारत हिल रही थी। बाद में मैंने लोगों को डर के मारे भागते देखा। जब मैं नीचे आया तो सड़कों पर भारी ट्रैफिक था और मुझे 30 किलोमीटर की दूरी तय करने में 5-6 घंटे का समय लग गया।'