म्यांमार की सेना ने सीमाई इलाकों में नस्लीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। खास कर चिन समूह के खिलाफ उसकी कार्रवाई की खबरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई हैं। इस वजह से इस समुदाय के कई लोग दूसरे देशों में शरणार्थी बनने को मजबूर हो रहे हैं। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम की एक खास रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार के चिन प्रांत के शहर थान्तलांग में हाल के समय में सेना ने जोरदार कार्रवाई की है।
मानव अधिकार संगठन- चिन ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (सीएचआरओ) के मुताबिक कुछ समय पहले एक 31 वर्षीय पादरी की म्यांमार के सैनिकों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। उसके बाद ही उस घटना से आहत चिन समुदाय के लोगों का उस इलाके से विस्थापन शुरू हो गया। सीएचआरओ के पदाधिकारी जा उक लिंग ने वेबसाइट निक्कई एशिया को बताया कि उस घटना के बाद भी सैनिक कार्रवाई जारी रही है। इस वजह से थान्तलांग शहर के दस हजार से अधिक लोग विस्थापित हो गए हैँ। उन्होंने आरोप लगाया कि बीते दो महीनों में सेना ने वहां 254 घरों को जला डाला है। इस दौरान आबादी पर गोलाबारी भी की गई है।
चिन समुदाय के लोगों की आबादी लगभग पांच लाख बताई जाती है। बताया जाता है कि चिन प्रांत में हुई सैनिक कार्रवाई के कारण कम से कम 30 हजार शरणार्थी भारत के मिजोरम में आ चुके हैं। उनके अलावा 40 लोग भाग कर म्यांमार के ही दूसरे इलाकों में चले गए हैं। सीएचआरओ ने दावा किया कि सेना ने सड़क संपर्क को काट रखा है, जिसकी वजह से उस इलाके में भोजन या दूसरी मानवीय सहायता पहुंचाना असंभव हो गया है।
म्यांमार में इस साल एक फरवरी को नई निर्वाचित सरकार के सत्ता संभालने से ठीक पहले सेना ने तख्ता पलट दिया था। आरोप है कि उसके बाद सेना ने हर उस समुदाय के खिलाफ क्रूर कार्रवाई की है, जिनसे उसे चुनौती मिलने की आशंका रही है। संयुक्त राष्ट्र के आपात राहत कोऑर्डिनेटर मार्टिन ग्रिफिथ ने नवंबर के आरंभ में बताया था कि सेना की कार्रवाइयों की वजह से म्यांमार में लगभग सवा दो लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। उन्होंने पुष्टि की थी कि सेना की कार्रवाइयों के दौरान मकानों, चर्च और स्वयंसेवी संगठनों के दफ्तरों को जला डाला गया है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सेना ने खासकर उन इलाकों को निशाना बनाया है, अल्पसंख्यक समूहों के सशस्त्र गुट सक्रिय हैं। ये समूह भी चीनी सेना पर हमले करते रहे हैं। उनमें चिन समुदाय के संगठन चिन नेशनल फ्रंट की हथियाबंद शाखा चिन नेशनल आर्मी भी शामिल है।
चिन नेशनल फ्रंट के उपाध्यक्ष सुइ खार ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- ‘चिन प्रांत में अधिक सघन सैनिक कार्रवाई हुई है, क्योंकि यहां सैनिक शासक का सबसे मजबूत विरोध हुआ है।’ इस वेबसाइट के मुताबिक एशिया में सैनिक खुफिया तंत्र से जुड़े सूत्रों ने चिन संगठनों से मिली जानकारियों की पुष्टि की है। लेकिन सैनिक शासन के प्रवक्ता ने चिन प्रांत में हिंसा के लिए चिन नेशनल फ्रंट को दोषी ठहराया है।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि चिन ईसाई बहुल प्रांत है, इसलिए सैनिक शासक वहां हो रहे प्रतिरोध को अलगाववादी आंदोलन के रूप चित्रित करने की कोशिश भी कर रहे हैं।