फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मेरे धर्म से किसी को क्या मतलब: टीएस ठाकुर

Mon, 21 Nov 2016 02:21 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
फाइल फोटोः जस्टिस टीएस ठाकुर - फोटो : PTI
विज्ञापन
समाज में शांति के लिए सहिष्णुता पर जोर देते हुए भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) टीएस ठाकुर ने रविवार को कहा कि इंसान और ईश्वर के बीच का रिश्ता ‘नितांत निजी’ होता है और ‘इससे किसी और को कोई मतलब नहीं होना चाहिए।’
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश रोहिंटन एफ नरीमन की पारसी धर्म पर लिखी किताब के विमोचन के मौके पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘मेरा धर्म क्या है? मैं ईश्वर से खुद को कैसे जोड़ता हूं? ईश्वर से मेरा कैसा रिश्ता है? इन चीजों से किसी और को कोई मतलब नहीं होना चाहिए। आप अपने ईश्वर के साथ अपना रिश्ता चुन सकते हैं।’ न्यायाधीश ने पारसी धर्म पर ‘दि इनर फायर, फेथ, चॉइस एंड मॉडर्न-डे लिविंग इन जोरोऐस्ट्रीअनिजम’ नामक पुस्तक लिखी है।

उन्होंने कहा कि इंसान और ईश्वर के बीच का रिश्ता ‘नितांत निजी और व्यक्तिगत’ होता है। लिहाजा, इससे किसी और को कोई मतलब नहीं होना चाहिए।’ 

न्यायाधीश ठाकुर ने कहा कि जितने लोग राजनीतिक विचारधाराओं के कारण नहीं मारे गए, उससे कहीं ज्यादा लोगों की जान धार्मिक युद्धों में गई है। न्यायाधीश ठाकुर ने यह भी कहा कि धार्मिक मान्यताओं की वजह से इस दुनिया में ज्यादा तबाही, नुकसान और खून-खराबे हुए हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें