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गंगा-जमुनी तहजीब की बेहतरीन मिसालः मुस्लिमों ने चंदा जुटा कर कराई हिंदू युवती की शादी

Mon, 27 Nov 2017 05:56 AM IST
रीता तिवारी/ अमर उजाला, कोलकाता
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सांप्रदायिक घटनाएं जहां देश के सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करती हैं वहीं दूसरी ओर आपसी सौहार्द के कुछ ऐसे वाकए भी सामने आते हैं जो लोगों को मिलजुल कर रहने की सीख देते हैं। पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल मालदा जिले के खानपुर गांव से एक ऐसी ही खुशखबर सामने आई है जो गंगा-जमुनी तहजीब की बेहतरीन मिसाल पेश करती है।
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छह सौ मुस्लिम परिवारों वाले मालदा जिले के खानपुर गांव में महज छह हिंदू परिवार रहते हैं। यहां मुसलमानों के समूह ने एक हिंदू युवती की शादी के लिए चंदा जुटाया और उसकी धूमधाम से शादी कराई।

इसकी पहल यहां के स्थानीय मदरसा हेड मास्टर मोतीउर रहमान ने की जिससे बेटी ‘सरस्वती’ की शादी गांव के ही युवक तपन चौधरी के साथ संपन्न हुई। बता दें कि ‘सरस्वती’ के मजदूर पिता की तीन साल पहले ही मृत्यु हो गई थी।
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पति की मौत के बाद पत्नी शोभारानी पर पांच बेटियों व एक बेटे को पालने की जिम्मेदारी आ गई थी। उनके लिए दो जून की रोटी जुटाना भी मुश्किल था। ऐसे में वह बेटी की शादी का भारी-भरकम खर्च कहां से जुटा पातीं।

मदरसा शिक्षक रहमान ने बताया कि शोभारानी की इस समस्या का जब उनको पता चला तो उन्होंने अपने पड़ोसियों से इस मसले पर बातचीत की।

इसके बाद सभी में इस बात पर सहमति बनी कि सब मिलजुल कर बेटी ‘सरस्वती’ की शादी का खर्च जुटाएंगे। इसके बाद रहमान और उनके समूह के लोग शोभारानी से मिले और उनको शादी लायक समुचित रकम जुटाकर देने का भरोसा दिया। शीघ्र ही यह रकम जुटा कर बेटी की शादी करा दी गई। 
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मदरसा हेड मास्टर मोतीउर रहमान ने निभाई पिता की भूमिका

शादी के बाद शनिवार को स्वागत समारोह आयोजित किया गया था। इस मौके पर शोभारानी के घर के दरवाजे पर बारातियों व मेहमानों के स्वागत के लिए मदरसा हेड मास्टर मोतीउर रहमान भी मौजूद थे।

 रहमान ने कहा, ‘सरस्वती के पिता जीवित होते तो यह काम वहीं करते। लेकिन उनके नहीं होने की वजह से मुझे यह भूमिका निभानी थी। आखिर ‘सरस्वती’ भी तो गांव की ही बेटी है।’
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