मुस्लिम वर्ल्ड लीग (एमडब्ल्यूएल) प्रमुख मोहम्मद बिन अब्दुलकरीम अल-इस्सा ने आतंकवादी संगठनों की आलोचना की और कहा कि वे धर्मों की छवि को बिगाड़ने का काम करते हैं। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि इस्लाम और आतंकवाद का एक-दूसरे से कोई लेना-देना नहीं है। अपनी पांच दिवसीय भारत यात्रा के दौरान अल-इस्सा ने दुनिया भर में बढ़ते संघर्षों और युद्धों पर चिंता व्यक्त की। भले ही इन संघर्षों के पीछे कारण कुछ भी हो, उन्होंने सभी के बीच शांति और प्रेम का आह्वान किया।
आतंकवादी संगठनों को कोई धर्म या देश नहीं: अल-इस्सा
बातचीत और बुद्धिमत्ता के माध्यम से संघर्षों को हल करने के महत्व पर जोर देते हुए अल-इस्सा ने कहा, उन्हें हल किया जा सके, इसलिए हम हमेशा उनके बीच समझ और बातचीत का समर्थन करते हैं। वैश्विक शांति, प्रगति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बने आईएसआईएस, अलकायदा, तालिबान और बोको हराम जैसे आतंकवादी संगठनों के बारे में पूछे जाने पर मुस्लिम वर्ल्ड लीग प्रमुख ने कहा कि इन संगठनों का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। शेख अल-इस्सा ने कहा, ये आतंकवादी संगठन अपने अलावा किसी का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं, उनका कोई धर्म या देश नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे विचारों का मुकाबला करने के लिए सऊदी अरब साम्राज्य के पास सबसे मजबूत मंच में से एक है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम वर्ल्ड लीग में हम इन विचारों को अस्तित्व से उखाड़ने पर काम कर रहे हैं।...वे वैचारिक विचार हैं, इसलिए हमें वैचारिक क्षेत्र में उनका सामना करने और इन विचारों को उखाड़ फेंकने की जरूरत है।
अल-इस्सा आतंकवाद के खिलाफ मुखर रहे हैं और बुधवार को "धर्मों के बीच सद्भाव के लिए संवाद" को संबोधित करते हुए उन्होंने फिर से आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले संगठनों पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि गलतफहमियों, घृणित सिद्धांतों और गलत धारणाओं ने कट्टरपंथ से आतंकवाद तक की राह को तेज कर दिया है। सत्ता पर कब्जा जमाने के लिए कई नेताओं ने अपना नियंत्रण और प्रासंगिकता सुनिश्चित करने के लिए नफरत भरे भाषणों का इस्तेमाल किया है।
मुस्लिम वर्ल्ड लीग प्रमुख ने आतंकवाद को इस्लाम से जोड़ने के विचार पर भी दुख जताया। उन्होंने कहा, बेशक जिस आतंकवाद को इस्लाम से संबंधित होने का गलत प्रचार किया जाता है, मुस्लिम धार्मिक नेता इस अलगाव को दूर करने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं कि इस्लाम और आतंकवाद का एक-दूसरे से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आतंकवाद से निपटने और शांति को बढ़ावा देने के लिए बातचीत, समझ और वैचारिक प्रयासों की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।