जुहरा ने कहा, 'मैंने पढ़ा है कि मोहम्मद के समय में भी उन महिलाओं को भी मस्जिद में नमाज पढ़ने का अधिकार था जो मानसिक धर्म से गुजर रही होती थीं। जब मोहम्मद खुद इसके समर्थन में थे, तो भारत में महिलाओं पर ऐसे प्रतिबंध क्यों हैं?' बता दें कि 28 सितंबर को संविधान सभा ने निर्णय दिया था कि मासिद धर्म के दौरान महिलाओं पर प्रतिबंध उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।