एक मुस्लिम महिला वकील ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड(एआईएमपीएलबी) व भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन(बीएमएमए) और हाफिज मोहम्मद सईद व उसके संगठन जमात-उद-दावा में कोई फर्क नहीं है। महिला वकील ने कहा कि इन सभी की विचारधारा एक हैं। इस महिला वकील को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक से जुड़े मामलों में दखल देने की इजाजत दी है।
महिला वकील फरहा फैज ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में शर्रियत कोर्ट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की बात करते हुए कहा है कि इसके जरिए देश की न्यायपालिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं और सरकार को चुनौती दी जा रही है। उन्होंने कहा कि देश को बचाने के लिए एआईएमपीएलबी और बीएमएमए जैसे संगठन को समाप्त कर दिया जाना चाहिए क्योंकि उनकी विचारधारा हाफिज सईद के समान है।
हलफनामे में कहा गया है कि देश में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, जिला अदालतें और फैमली कोर्ट के अलावा संघीय शर्रियत कोर्ट भी है। संघीय शर्रियत कोर्ट केसाथ-साथ मजबूत न्यायिक प्रणाली होने के बावजूद रूढ़िवादी लोग संतुष्टï नहीं हैं और अपनी शर्रियत कोर्ट चल रहे हैं। मध्यस्थता, त्वरित और कर्म खर्च में न्याय दिलाने केनाम पर ये लोग भोले-भाले लोगों को गुमराह रहे हैं।