सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम पक्ष की पैरवी कर रहे राजीव धवन को मिली धमकी पर मंगलवार को सुनवाई करेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सीजेआई की बेंच के समक्ष धवन की अवमानना याचिका का उल्लेख कर इस पर त्वरित सुनवाई की मांग की। इस पर कोर्ट मंगलवार को सुनवाई के लिए राजी हो गया। धवन ने शुक्रवार को दायर याचिका में बताया था कि उन्हें अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्ष की ओर से पैरवी करने पर धमकी दी जा रही है। याचिका में कहा गया है कि धमकी भरे पत्र के जरिए वकील को उसके कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए धमकी देना, न्याय प्रशासन के कामकाज में हस्तक्षेप है और इसलिए यह आपराधिक अवमानना का मामला है।
अतिक्रमण, फिर हमला किया, मस्जिद तोड़ी अब जमीन चाहते हैं
धवन ने कहा, हिंदुओं ने 1934 में बाबरी मस्जिद पर हमला किया, 1949 में इस पर अतिक्रमण किया और अंत में 1992 में इसे ढहा दिया गया। वे कहते हैं कि अंग्रेजों ने हिंदुओं के खिलाफ सहयोग किया। अब विवादित जमीन पर अपने अधिकार की रक्षा चाहते हैं। इस पर सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने धवन से कहा कि आपको इन बातों में जाने की जरूरत नहीं। आप केस से जुड़ी दलीलें दीजिए।
इसके जवाब में धवन ने कहा कि यह मुद्दे दूसरे पक्ष की ओर से उठाए गए हैं, इसलिए जवाब देने की अनुमति दी जाए। इस दौरान रामलला विराजमान की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि धवन को दलीलें पेश करने दी जाएं। इस पर सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि धवन जिस तरीके से चाहें केस रखने को स्वतंत्र हैं। बेंच में सीजेआई के अलावा जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए नजीर भी शामिल हैं।