बैंक में काम करने वाले अधिकारियों के सबसे बड़े संगठन ऑल इंडिया बैंक आफिसर्स कंफेडरेशन -एआईबीओसी- के महासचिव सौम्य दत्ता ने बताया कि बैंक के सभी मान्यता प्राप्त यूनियनों के पदाधिकारी शीघ्र ही बैठ कर आगे की रणनीति तय करेंगे। बैंक अधिकारियों के चार संगठन आगामी पांच सितंबर को बैठ रहे हैं।
इसके बाद 11 सितंबर को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन की बैठक हो रही है। इसमें कर्मचारियों की पांच यूनियन और अधिकारियों के चार संगठन शामिल हैं। उसी में आगे की रणनीति तय की जाएगी।
एआईबीओसी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष पंकज कपूर का कहना है कि लड़ाई होना तय है क्योंकि यह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अस्तित्व की लड़ाई है। सरकार ने पहले भी स्टेट बैंक के समूह के बैंकों का विलय किया, लेकिन अभी भी वहां सहयोगी बैंक के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्टेट बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों की तरह सुविधा नहीं मिल रही है।
इसी तरह बैंक ऑफ बड़ौदा में जो विजया बैंक और देना बैंक का विलय हुआ, वहां सभी कर्मचारियों की सेवा शर्तें समान नहीं है। अभी भी उनके बीच भेद-भाव जारी है। यही हालत हाल में अन्य बैंकों के कर्मचारियों के साथ भी होगा। इसलिए अब सरकार से अब लंबी लड़ाई लड़ी जाएगी और इसमें यदि अनिश्चितकालीन हड़ताल पर भी जाना पड़े तो वैसा होगा।