कई महीनों पहले केंद्र सरकार ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उस हलफनामे को सुप्रीम कोर्ट में महिलाओं के प्रति द्वेष वाला बताया जिसमें कहा गया है कि शरीयत में पुरषों को तीन तलाक कहने की आजादी दी गई है क्योंकि उनके पास फैसले लेने की ज्यादा क्षमता है। वहीं एक प्रभावशाली मुस्लिम संगठन ने पर्सनल लॉ बोर्ड के इस स्टैंड पर आपत्ति जताई है।
14 मुस्लिम संगठनों वाले ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत ने AIMPLB पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने हलफनामे में मुस्लिम समुदाय के दो प्रमुख वर्गों अहले हदीस और जाफरी (शिया) संप्रदायों द्वारा दिए जा रहे तलाक के बारे में जानकारी नहीं दी है।
इन दो वर्गों में ऐसी प्रथा है कि वो कुरान द्वारा दी गई अनुमति के तहत पहले जोड़े के बीच सुलह की कोशिश करते हैं और ऐसा न होने पर एक बार में तीन बार तलाक बोलकर इस प्रक्रिया को खत्म कर देते हैं।