आरएसएस की रोजा इफ्तार पार्टी में एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह के शामिल होने पर अलीगढ़ से लेकर सात समंदर पार तक बवाल मच गया है। आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार के साथ मंच साझा करने एवं हाथ पकड़ कर गुफ्तगू करने का जमकर विरोध हो रहा है।
बरनी फाउंडेशन कार्यालय पर एएमयू के पूर्व कोर्ट मेंबर एवं पूर्व एग्जीक्यूटिव काउंसिल सदस्य प्रो. रजाउल्लाह खान ने आरएसएस के कार्यक्रम में वीसी के शामिल होने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इससे पहले पीएम से जब वीसी मिलने गए थे तो लोग नाराज थे, लेकिन प्रधानमंत्री एक संवैधानिक पद है। लेकिन आरएसएस के इफ्तार में जाकर वीसी ने एएमयू के लोगों के जज्बात से खिलवाड़ किया है। इफ्तार में जाने से साफ हो गया है कि वीसी कोई अपना एजेंडा लेकर चल रहे हैं।
एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष शहजाद आलम बरनी ने कहा कि वीसी आरएसएस एजेंट की तरह काम कर रहे हैं। पहले मुजफ्फरनगर दंगा के आरोपी के साथ गए थे और अब मालेगांव के आरोपी के साथ इफ्तार करने चले गए। वीसी बताएं कि एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप को लेकर उनका क्या रुख है। यूनाइटेड उलेमा फॉर नेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना जाकिर कासमी ने कहा कि वीसी एएमयू से मुस्लिम माहौल को खत्म करने में लगे हुए हैं।
वे जान बूझ कर रमजान में हॉस्टल तक बंद कर दिए जिसकी वजह से मस्जिदें वीरान पड़ी हुई हैं। इस मसले को लेकर सोशल मीडिया पर भी जोरदार विरोध हो रहा है। एएमयू नेटवर्क, एनआरआई नेटवर्क एवं एएमयू के वर्तमान एवं पूर्व छात्रों से संबंधित ग्रुप पर बहस छिड़ी है। आने वाले समय में यह मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है। उल्लेखनीय है कि एएमयू वीसी शनिवार को नई दिल्ली के पार्लियामेंट हाउस एनेक्सी में मुस्लिम देशों के राजदूत के सम्मान में आयोजित रोजा इफ्तार में शामिल हुए थे। इसका आयोजन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच द्वारा किया गया था और आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया था।