खान ने कहा, उन्हें आजादी के बाद से उन्हें समुदाय की ओर से चुना नहीं जाता और न ही वे किसी चुनाव का सामना करते हैं। वे इस्लाम का एकमात्र प्रवक्ता होने का दावा करते हैं।
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने रविवार को कहा कि पूर्व की सरकारों की तरह मुस्लिम मौलवियों को भाजपा सरकार में सुविधाएं नहीं मिल रहीं इसलिए वे नाराज हैं। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि वह हर मौके का देश में हंगामा खड़ा करने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
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खान ने कहा, उन्हें आजादी के बाद से उन्हें समुदाय की ओर से चुना नहीं जाता और न ही वे किसी चुनाव का सामना करते हैं। वे इस्लाम का एकमात्र प्रवक्ता होने का दावा करते हैं। उन्होंने पूर्व की सरकारों को ऐसा मानने के लिए बाध्य किया। उन्होंने विभाजन से पूर्व के मुस्लिम लीग की भाषा का इस्तेमाल किया। लेकिन मौजूदा सरकार उन्हें कोई सुविधा नहीं दे रही। यह भी सुनिश्चित किया गया कि तीन तलाक पर सु्प्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान हो। ऐसे में वे बेचैन हैं और खुद पानी से बाहर निकाली गई मछली की तरह महसूस कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौलवियों का रवैया समाज के बीच दीवार खड़ी करने वाला है।
यह विवाद नहीं, सोची-समझी साजिश
खान ने कहा, मैं यह बड़ी शिद्दत से महसूस करता हूं कि यह कोई विवाद नहीं है बल्कि मुस्लिम महिलाओं को घर की चहारदीवारी में बंद रखने की एक सोची-समझी साजिश है। वे लड़कों से बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। यह उनको हतोत्साहित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा, यदि वह विश्वविद्यालय में हिजाब पहनेंगी तो कैसी कंपनियां उन्हें प्राथमिकता देंगी? इससे तो महिलाएं अपनी शिक्षा और करियर को आगे नहीं बढ़ा पाएंगी।